14 जून 2028 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 14 जून 2028, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 जून 2028 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (20:46 तक), नक्षत्र शतभिषा (13:02 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 12:27 से 14:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 19:21
रात 05:32 तक
तिथि
सप्तमी, 20:46 तक
अष्टमी
नक्षत्र
शतभिषा, 13:02 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जून 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:46 तक
कृष्ण अष्टमी 23:04, 15 जून तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:02 तक
पूर्वा भाद्रपद 15:58, 15 जून तक
योग
प्रीति 02:25, 15 जून तक
आयुष्मान 03:16, 16 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:33 तक
बव 20:46 तक
बालव 09:57, 15 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:41
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:27 – 14:10
यमगंड
07:16 – 08:59
गुलिक काल
10:43 – 12:27

14 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:32 – 07:16शुभ
अमृत07:16 – 08:59शुभ
काल08:59 – 10:43टालें
शुभ10:43 – 12:27शुभ
रोग12:27 – 14:10टालें
उद्वेग14:10 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:38सामान्य
लाभ17:38 – 19:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:21 – 20:38टालें
शुभ20:38 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:10शुभ
चर23:10 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:43टालें
काल01:43 – 02:59टालें
लाभ02:59 – 04:16शुभ
उद्वेग04:16 – 05:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3206:41दिन
चंद्र06:4107:50दिन
शनि07:5008:59दिन
गुरु08:5910:09दिन
मंगल10:0911:18दिन
सूर्य11:1812:27दिन
शुक्र12:2713:36दिन
बुध13:3614:45दिन
चंद्र14:4515:54दिन
शनि15:5417:03दिन
गुरु17:0318:12दिन
मंगल18:1219:21दिन
सूर्य19:2120:12रात
शुक्र20:1221:03रात
बुध21:0321:54रात
चंद्र21:5422:45रात
शनि22:4523:36रात
गुरु23:3600:27रात
मंगल00:2701:18रात
सूर्य01:1802:09रात
शुक्र02:0902:59रात
बुध02:5903:50रात
चंद्र03:5004:41रात
शनि04:4105:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2545° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।