7 अगस्त 2028 को जयपुर का पंचांग

सोमवार, 7 अगस्त 2028, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 7 अगस्त 2028 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (18:04 तक), नक्षत्र शतभिषा (03:38, 8 अग॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 07:33 से 09:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 19:10
रात 05:55 तक
तिथि
द्वितीया, 18:04 तक
तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा, 03:38 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अगस्त 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 18:04 तक
कृष्ण तृतीया 20:30, 8 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 03:38, 8 अग॰ तक
योग
शोभन 18:19 तक
अतिगंडअशुभ 19:17, 8 अग॰ तक
करण
गर 18:04 तक
वणिज 07:16, 8 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
20:11
चंद्रास्त
07:27
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:58

अशुभ समय

राहुकाल
07:33 – 09:13
यमगंड
10:52 – 12:32
गुलिक काल
14:11 – 15:51

7 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:54 – 07:33शुभ
काल07:33 – 09:13टालें
शुभ09:13 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:32टालें
उद्वेग12:32 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:51सामान्य
लाभ15:51 – 17:30शुभ
अमृत17:30 – 19:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:10 – 20:30सामान्य
रोग20:30 – 21:51टालें
काल21:51 – 23:12टालें
लाभ23:12 – 00:32शुभ
उद्वेग00:32 – 01:53टालें
शुभ01:53 – 03:13शुभ
अमृत03:13 – 04:34शुभ
चर04:34 – 05:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5407:00दिन
शनि07:0008:07दिन
गुरु08:0709:13दिन
मंगल09:1310:19दिन
सूर्य10:1911:26दिन
शुक्र11:2612:32दिन
बुध12:3213:38दिन
चंद्र13:3814:45दिन
शनि14:4515:51दिन
गुरु15:5116:57दिन
मंगल16:5718:03दिन
सूर्य18:0319:10दिन
शुक्र19:1020:04रात
बुध20:0420:57रात
चंद्र20:5721:51रात
शनि21:5122:45रात
गुरु22:4523:38रात
मंगल23:3800:32रात
सूर्य00:3201:26रात
शुक्र01:2602:20रात
बुध02:2003:13रात
चंद्र03:1304:07रात
शनि04:0705:01रात
गुरु05:0105:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2566° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।