10 जून 2029 को जयपुर का पंचांग

रविवार, 10 जून 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 10 जून 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:48 तक), नक्षत्र कृत्तिका (00:05, 11 जून तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 17:36 से 19:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 19:20
रात 05:32 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 00:05 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जून 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:48 तक
कृष्ण चतुर्दशी 08:17, 11 जून तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:05, 11 जून तक
रोहिणी 01:54, 12 जून तक
योग
सुकर्मा 19:27 तक
धृति 19:30, 11 जून तक
करण
वणिज 06:48 तक
विष्टि (भद्रा) 19:36 तक
शकुनि 08:17, 11 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
03:48
चंद्रास्त
17:53
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
17:36 – 19:20
यमगंड
12:26 – 14:09
गुलिक काल
15:53 – 17:36

10 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:32 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:59सामान्य
लाभ08:59 – 10:42शुभ
अमृत10:42 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:09टालें
शुभ14:09 – 15:53शुभ
रोग15:53 – 17:36टालें
उद्वेग17:36 – 19:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:20 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 21:53शुभ
चर21:53 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:26टालें
काल00:26 – 01:42टालें
लाभ01:42 – 02:59शुभ
उद्वेग02:59 – 04:15टालें
शुभ04:15 – 05:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3206:41दिन
शुक्र06:4107:50दिन
बुध07:5008:59दिन
चंद्र08:5910:08दिन
शनि10:0811:17दिन
गुरु11:1712:26दिन
मंगल12:2613:35दिन
सूर्य13:3514:44दिन
शुक्र14:4415:53दिन
बुध15:5317:02दिन
चंद्र17:0218:11दिन
शनि18:1119:20दिन
गुरु19:2020:11रात
मंगल20:1121:02रात
सूर्य21:0221:53रात
शुक्र21:5322:44रात
बुध22:4423:35रात
चंद्र23:3500:26रात
शनि00:2601:17रात
गुरु01:1702:08रात
मंगल02:0802:59रात
सूर्य02:5903:50रात
शुक्र03:5004:41रात
बुध04:4105:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2683° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।