15 जुलाई 2029 को जयपुर का पंचांग

रविवार, 15 जुलाई 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 15 जुलाई 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (15:36 तक), नक्षत्र मघा (09:27 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 17:40 से 19:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 19:22
रात 05:43 तक
तिथि
चतुर्थी, 15:36 तक
पंचमी
नक्षत्र
मघा, 09:27 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जुलाई 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 15:36 तक
शुक्ल पंचमी 13:28, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 09:27 तक
पूर्वा फाल्गुनी 08:08, 16 जुल॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 16:51 तक
वरीयान 14:04, 16 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:36 तक
बव 02:33, 16 जुल॰ तक
बालव 13:28, 16 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
09:15
चंद्रास्त
21:50
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
17:40 – 19:22
यमगंड
12:32 – 14:15
गुलिक काल
15:57 – 17:40

15 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:42 – 07:25टालें
चर07:25 – 09:07सामान्य
लाभ09:07 – 10:50शुभ
अमृत10:50 – 12:32शुभ
काल12:32 – 14:15टालें
शुभ14:15 – 15:57शुभ
रोग15:57 – 17:40टालें
उद्वेग17:40 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:22 – 20:40शुभ
अमृत20:40 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:15सामान्य
रोग23:15 – 00:32टालें
काल00:32 – 01:50टालें
लाभ01:50 – 03:08शुभ
उद्वेग03:08 – 04:25टालें
शुभ04:25 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4206:50दिन
शुक्र06:5007:59दिन
बुध07:5909:07दिन
चंद्र09:0710:16दिन
शनि10:1611:24दिन
गुरु11:2412:32दिन
मंगल12:3213:41दिन
सूर्य13:4114:49दिन
शुक्र14:4915:57दिन
बुध15:5717:06दिन
चंद्र17:0618:14दिन
शनि18:1419:22दिन
गुरु19:2220:14रात
मंगल20:1421:06रात
सूर्य21:0621:57रात
शुक्र21:5722:49रात
बुध22:4923:41रात
चंद्र23:4100:32रात
शनि00:3201:24रात
गुरु01:2402:16रात
मंगल02:1603:08रात
सूर्य03:0803:59रात
शुक्र03:5904:51रात
बुध04:5105:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2696° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।