1 अगस्त 2029 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 1 अगस्त 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 अगस्त 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (03:34, 2 अग॰ तक), नक्षत्र रेवती (08:03 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 12:33 से 14:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 19:14
रात 05:51 तक
तिथि
सप्तमी, 03:34 तक
अष्टमी
नक्षत्र
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 03:34, 2 अग॰ तक
कृष्ण अष्टमी 05:54, 3 अग॰ तक
नक्षत्र
रेवती 08:03 तक
अश्विनी 11:00, 2 अग॰ तक
योग
धृति 11:24 तक
शूलअशुभ 12:21, 2 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:22 तक
बव 03:34, 2 अग॰ तक
बालव 16:45, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
मीन 08:03 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
23:01
चंद्रास्त
11:45
दिनमान
13h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:59 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:33 – 14:13
यमगंड
07:31 – 09:12
गुलिक काल
10:52 – 12:33

1 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:51 – 07:31शुभ
अमृत07:31 – 09:12शुभ
काल09:12 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:33शुभ
रोग12:33 – 14:13टालें
उद्वेग14:13 – 15:53टालें
चर15:53 – 17:34सामान्य
लाभ17:34 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:14 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:13शुभ
चर23:13 – 00:33सामान्य
रोग00:33 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:12टालें
लाभ03:12 – 04:32शुभ
उद्वेग04:32 – 05:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5106:58दिन
चंद्र06:5808:05दिन
शनि08:0509:12दिन
गुरु09:1210:19दिन
मंगल10:1911:26दिन
सूर्य11:2612:33दिन
शुक्र12:3313:39दिन
बुध13:3914:46दिन
चंद्र14:4615:53दिन
शनि15:5317:00दिन
गुरु17:0018:07दिन
मंगल18:0719:14दिन
सूर्य19:1420:07रात
शुक्र20:0721:00रात
बुध21:0021:54रात
चंद्र21:5422:47रात
शनि22:4723:40रात
गुरु23:4000:33रात
मंगल00:3301:26रात
सूर्य01:2602:19रात
शुक्र02:1903:12रात
बुध03:1204:05रात
चंद्र04:0504:58रात
शनि04:5805:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2703° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।