29 अगस्त 2029 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 29 अगस्त 2029, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 अगस्त 2029 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:12 तक), नक्षत्र अश्विनी (18:41 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 12:27 से 14:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:50
रात 06:05 तक
तिथि
पंचमी, 16:12 तक
षष्ठी
नक्षत्र
अश्विनी, 18:41 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अगस्त 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:12 तक
कृष्ण षष्ठी 18:41, 30 अग॰ तक
नक्षत्र
भरणी 21:42, 30 अग॰ तक
योग
वृद्धि 20:48 तक
ध्रुव 21:47, 30 अग॰ तक
करण
तैतिल 16:12 तक
गर 05:27, 30 अग॰ तक
वणिज 18:41, 30 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
21:37
चंद्रास्त
10:30
दिनमान
12h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:27 – 14:03
यमगंड
07:40 – 09:16
गुलिक काल
10:51 – 12:27

29 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:04 – 07:40शुभ
अमृत07:40 – 09:16शुभ
काल09:16 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:27शुभ
रोग12:27 – 14:03टालें
उद्वेग14:03 – 15:38टालें
चर15:38 – 17:14सामान्य
लाभ17:14 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:50 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:38शुभ
अमृत21:38 – 23:03शुभ
चर23:03 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:16टालें
लाभ03:16 – 04:40शुभ
उद्वेग04:40 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0407:08दिन
चंद्र07:0808:12दिन
शनि08:1209:16दिन
गुरु09:1610:20दिन
मंगल10:2011:23दिन
सूर्य11:2312:27दिन
शुक्र12:2713:31दिन
बुध13:3114:35दिन
चंद्र14:3515:38दिन
शनि15:3816:42दिन
गुरु16:4217:46दिन
मंगल17:4618:50दिन
सूर्य18:5019:46रात
शुक्र19:4620:42रात
बुध20:4221:38रात
चंद्र21:3822:35रात
शनि22:3523:31रात
गुरु23:3100:27रात
मंगल00:2701:24रात
सूर्य01:2402:20रात
शुक्र02:2003:16रात
बुध03:1604:12रात
चंद्र04:1205:09रात
शनि05:0906:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2714° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।