18 सितंबर 2026 को जामनगर का पंचांग

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026, जामनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को जामनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (13:01 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:44 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 11:12 से 12:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 18:50
रात 06:37 तक
तिथि
सप्तमी, 13:01 तक
अष्टमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:44 तक
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 13:01 तक
शुक्ल अष्टमी 15:27, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 01:43, 20 सित॰ तक
योग
प्रीति 13:34 तक
आयुष्मान 14:29, 19 सित॰ तक
करण
वणिज 13:01 तक
विष्टि (भद्रा) 02:13, 19 सित॰ तक
बव 15:27, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
13:04
चंद्रास्त
23:43
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
11:12 – 12:43
यमगंड
15:47 – 17:18
गुलिक काल
08:08 – 09:40

18 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:37 – 08:08सामान्य
लाभ08:08 – 09:40शुभ
अमृत09:40 – 11:12शुभ
काल11:12 – 12:43टालें
शुभ12:43 – 14:15शुभ
रोग14:15 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:18टालें
चर17:18 – 18:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:50 – 20:18टालें
काल20:18 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:15शुभ
उद्वेग23:15 – 00:43टालें
शुभ00:43 – 02:12शुभ
अमृत02:12 – 03:40शुभ
चर03:40 – 05:09सामान्य
रोग05:09 – 06:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3707:38दिन
बुध07:3808:39दिन
चंद्र08:3909:40दिन
शनि09:4010:41दिन
गुरु10:4111:42दिन
मंगल11:4212:43दिन
सूर्य12:4313:44दिन
शुक्र13:4414:45दिन
बुध14:4515:47दिन
चंद्र15:4716:48दिन
शनि16:4817:49दिन
गुरु17:4918:50दिन
मंगल18:5019:49रात
सूर्य19:4920:48रात
शुक्र20:4821:47रात
बुध21:4722:46रात
चंद्र22:4623:44रात
शनि23:4400:43रात
गुरु00:4301:42रात
मंगल01:4202:41रात
सूर्य02:4103:40रात
शुक्र03:4004:39रात
बुध04:3905:38रात
चंद्र05:3806:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां जामनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2302° (लाहिड़ी)। समय जामनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।