4 जनवरी 2028 को जामनगर का पंचांग

मंगलवार, 4 जनवरी 2028, जामनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 4 जनवरी 2028 को जामनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (18:20 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (00:42, 5 जन॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 07:30 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 15:36 से 16:57 तक है।

दिन और रात
दिन 07:30 – 18:18
रात 07:30 तक
तिथि
सप्तमी, 18:20 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 00:42 तक
रेवती
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जनवरी 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 18:20 तक
शुक्ल अष्टमी 19:50, 5 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 02:31, 6 जन॰ तक
योग
वरीयान 13:07 तक
परिघअशुभ 13:15, 5 जन॰ तक
करण
वणिज 18:20 तक
विष्टि (भद्रा) 07:10, 5 जन॰ तक
बव 19:50, 5 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:30
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
11:55
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:44 – 06:37
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:16

अशुभ समय

राहुकाल
15:36 – 16:57
यमगंड
10:12 – 11:33
गुलिक काल
12:54 – 14:15

4 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:30 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:12टालें
चर10:12 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:54शुभ
अमृत12:54 – 14:15शुभ
काल14:15 – 15:36टालें
शुभ15:36 – 16:57शुभ
रोग16:57 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:18 – 19:57टालें
लाभ19:57 – 21:36शुभ
उद्वेग21:36 – 23:15टालें
शुभ23:15 – 00:54शुभ
अमृत00:54 – 02:33शुभ
चर02:33 – 04:12सामान्य
रोग04:12 – 05:51टालें
काल05:51 – 07:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:3008:24दिन
सूर्य08:2409:18दिन
शुक्र09:1810:12दिन
बुध10:1211:06दिन
चंद्र11:0612:00दिन
शनि12:0012:54दिन
गुरु12:5413:48दिन
मंगल13:4814:42दिन
सूर्य14:4215:36दिन
शुक्र15:3616:30दिन
बुध16:3017:24दिन
चंद्र17:2418:18दिन
शनि18:1819:24रात
गुरु19:2420:30रात
मंगल20:3021:36रात
सूर्य21:3622:42रात
शुक्र22:4223:48रात
बुध23:4800:54रात
चंद्र00:5402:00रात
शनि02:0003:06रात
गुरु03:0604:12रात
मंगल04:1205:18रात
सूर्य05:1806:24रात
शुक्र06:2407:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जामनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2483° (लाहिड़ी)। समय जामनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।