1 अक्टूबर 2028 को जामनगर का पंचांग

रविवार, 1 अक्टूबर 2028, जामनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 अक्टूबर 2028 को जामनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (17:05 तक), नक्षत्र शतभिषा (15:57 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 17:07 से 18:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 18:36
रात 06:41 तक
तिथि
त्रयोदशी, 17:05 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 15:57 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 17:05 तक
शुक्ल चतुर्दशी 19:34, 2 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 15:57 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:56, 2 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 07:31 तक
गंडअशुभ 08:27, 2 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 17:05 तक
गर 06:20, 2 अक्टू॰ तक
वणिज 19:34, 2 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
17:08
चंद्रास्त
04:35
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:02

अशुभ समय

राहुकाल
17:07 – 18:36
यमगंड
12:39 – 14:08
गुलिक काल
15:38 – 17:07

1 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:41 – 08:10टालें
चर08:10 – 09:40सामान्य
लाभ09:40 – 11:09शुभ
अमृत11:09 – 12:39शुभ
काल12:39 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:38शुभ
रोग15:38 – 17:07टालें
उद्वेग17:07 – 18:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:36 – 20:07शुभ
अमृत20:07 – 21:38शुभ
चर21:38 – 23:08सामान्य
रोग23:08 – 00:39टालें
काल00:39 – 02:09टालें
लाभ02:09 – 03:40शुभ
उद्वेग03:40 – 05:11टालें
शुभ05:11 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4107:40दिन
शुक्र07:4008:40दिन
बुध08:4009:40दिन
चंद्र09:4010:39दिन
शनि10:3911:39दिन
गुरु11:3912:39दिन
मंगल12:3913:38दिन
सूर्य13:3814:38दिन
शुक्र14:3815:38दिन
बुध15:3816:37दिन
चंद्र16:3717:37दिन
शनि17:3718:36दिन
गुरु18:3619:37रात
मंगल19:3720:37रात
सूर्य20:3721:38रात
शुक्र21:3822:38रात
बुध22:3823:38रात
चंद्र23:3800:39रात
शनि00:3901:39रात
गुरु01:3902:40रात
मंगल02:4003:40रात
सूर्य03:4004:40रात
शुक्र04:4005:41रात
बुध05:4106:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां जामनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2587° (लाहिड़ी)। समय जामनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।