6 नवंबर 2025 को जूनागढ़ का पंचांग

गुरुवार, 6 नवंबर 2025, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 6 नवंबर 2025 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (14:55 तक), नक्षत्र कृत्तिका (03:27, 7 नव॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 13:56 से 15:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 18:09
रात 06:54 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:55 तक
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 03:27 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 नवंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 14:55 तक
कृष्ण द्वितीया 11:05, 7 नव॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 03:27, 7 नव॰ तक
रोहिणी 00:33, 8 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:04 तक
वरीयान 02:41, 7 नव॰ तक
परिघअशुभ 22:27, 7 नव॰ तक
करण
कौलव 14:55 तक
तैतिल 00:59, 7 नव॰ तक
गर 11:05, 7 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 11:47 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
18:44
चंद्रास्त
07:34
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
13:56 – 15:20
यमगंड
06:54 – 08:18
गुलिक काल
09:42 – 11:07

6 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:54 – 08:18शुभ
रोग08:18 – 09:42टालें
उद्वेग09:42 – 11:07टालें
चर11:07 – 12:31सामान्य
लाभ12:31 – 13:56शुभ
अमृत13:56 – 15:20शुभ
काल15:20 – 16:44टालें
शुभ16:44 – 18:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:09 – 19:44शुभ
चर19:44 – 21:20सामान्य
रोग21:20 – 22:56टालें
काल22:56 – 00:31टालें
लाभ00:31 – 02:07शुभ
उद्वेग02:07 – 03:43टालें
शुभ03:43 – 05:18शुभ
अमृत05:18 – 06:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5407:50दिन
मंगल07:5008:46दिन
सूर्य08:4609:42दिन
शुक्र09:4210:39दिन
बुध10:3911:35दिन
चंद्र11:3512:31दिन
शनि12:3113:27दिन
गुरु13:2714:24दिन
मंगल14:2415:20दिन
सूर्य15:2016:16दिन
शुक्र16:1617:13दिन
बुध17:1318:09दिन
चंद्र18:0919:13रात
शनि19:1320:16रात
गुरु20:1621:20रात
मंगल21:2022:24रात
सूर्य22:2423:28रात
शुक्र23:2800:31रात
बुध00:3101:35रात
चंद्र01:3502:39रात
शनि02:3903:43रात
गुरु03:4304:47रात
मंगल04:4705:50रात
सूर्य05:5006:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2181° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।