21 नवंबर 2029 को जूनागढ़ का पंचांग

बुधवार, 21 नवंबर 2029, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 21 नवंबर 2029 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (09:33 तक), नक्षत्र कृत्तिका (19:55 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 12:33 से 13:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 18:04
रात 07:03 तक
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
कृत्तिका, 19:55 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 नवंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 09:33 तक
कृष्ण प्रतिपदा 11:53, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 22:38, 22 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 16:18 तक
शिव 16:58, 22 नव॰ तक
करण
बव 09:33 तक
बालव 22:44 तक
कौलव 11:53, 22 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
18:11
चंद्रास्त
07:03
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:33 – 13:56
यमगंड
08:25 – 09:48
गुलिक काल
11:11 – 12:33

21 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:03 – 08:25शुभ
अमृत08:25 – 09:48शुभ
काल09:48 – 11:11टालें
शुभ11:11 – 12:33शुभ
रोग12:33 – 13:56टालें
उद्वेग13:56 – 15:19टालें
चर15:19 – 16:42सामान्य
लाभ16:42 – 18:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:04 – 19:42टालें
शुभ19:42 – 21:19शुभ
अमृत21:19 – 22:56शुभ
चर22:56 – 00:34सामान्य
रोग00:34 – 02:11टालें
काल02:11 – 03:48टालें
लाभ03:48 – 05:26शुभ
उद्वेग05:26 – 07:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0307:58दिन
चंद्र07:5808:53दिन
शनि08:5309:48दिन
गुरु09:4810:43दिन
मंगल10:4311:38दिन
सूर्य11:3812:33दिन
शुक्र12:3313:29दिन
बुध13:2914:24दिन
चंद्र14:2415:19दिन
शनि15:1916:14दिन
गुरु16:1417:09दिन
मंगल17:0918:04दिन
सूर्य18:0419:09रात
शुक्र19:0920:14रात
बुध20:1421:19रात
चंद्र21:1922:24रात
शनि22:2423:29रात
गुरु23:2900:34रात
मंगल00:3401:39रात
सूर्य01:3902:44रात
शुक्र02:4403:48रात
बुध03:4804:53रात
चंद्र04:5305:58रात
शनि05:5807:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2746° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।