13 सितंबर 2027 को काठमांडू का पंचांग

सोमवार, 13 सितंबर 2027, काठमांडू, नेपाल। समय Asia/Kathmandu में है।

सोमवार, 13 सितंबर 2027 को काठमांडू में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (00:55, 14 सित॰ तक), नक्षत्र श्रवण (06:20 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 07:20 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 18:11
रात 05:48 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:55 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 सितंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 00:55, 14 सित॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 03:03, 15 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 06:20 तक
धनिष्ठा 09:14, 14 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 08:00 तक
सुकर्मा 08:51, 14 सित॰ तक
करण
कौलव 11:43 तक
तैतिल 00:55, 14 सित॰ तक
गर 14:02, 14 सित॰ तक
चंद्र राशि
मकर 19:49 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
16:41
चंद्रास्त
03:16
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
07:20 – 08:53
यमगंड
10:26 – 11:59
गुलिक काल
13:32 – 15:05

13 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:47 – 07:20शुभ
काल07:20 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:26शुभ
रोग10:26 – 11:59टालें
उद्वेग11:59 – 13:32टालें
चर13:32 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:38शुभ
अमृत16:38 – 18:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:11 – 19:38सामान्य
रोग19:38 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:32टालें
लाभ22:32 – 23:59शुभ
उद्वेग23:59 – 01:26टालें
शुभ01:26 – 02:54शुभ
अमृत02:54 – 04:21शुभ
चर04:21 – 05:48सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4706:49दिन
शनि06:4907:51दिन
गुरु07:5108:53दिन
मंगल08:5309:55दिन
सूर्य09:5510:57दिन
शुक्र10:5711:59दिन
बुध11:5913:01दिन
चंद्र13:0114:03दिन
शनि14:0315:05दिन
गुरु15:0516:07दिन
मंगल16:0717:09दिन
सूर्य17:0918:11दिन
शुक्र18:1119:09रात
बुध19:0920:07रात
चंद्र20:0721:05रात
शनि21:0522:03रात
गुरु22:0323:01रात
मंगल23:0123:59रात
सूर्य23:5900:57रात
शुक्र00:5701:55रात
बुध01:5502:54रात
चंद्र02:5403:52रात
शनि03:5204:50रात
गुरु04:5005:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां काठमांडू में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2440° (लाहिड़ी)। समय काठमांडू (Asia/Kathmandu) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।