5 अक्टूबर 2027 को काठमांडू का पंचांग

मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027, काठमांडू, नेपाल। समय Asia/Kathmandu में है।

मंगलवार, 5 अक्टूबर 2027 को काठमांडू में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (02:48, 6 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (02:30, 6 अक्टू॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 14:48 से 16:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:45
रात 05:58 तक
तिथि
षष्ठी, 02:48 तक
सप्तमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 02:30 तक
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 02:48, 6 अक्टू॰ तक
शुक्ल सप्तमी 04:28, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:30, 6 अक्टू॰ तक
मूल 04:43, 7 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 11:58 तक
सौभाग्य 11:53, 6 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 14:14 तक
तैतिल 02:48, 6 अक्टू॰ तक
गर 15:33, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 02:30, 6 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
11:09
चंद्रास्त
21:27
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
14:48 – 16:17
यमगंड
08:55 – 10:23
गुलिक काल
11:52 – 13:20

5 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 – 07:26टालें
उद्वेग07:26 – 08:55टालें
चर08:55 – 10:23सामान्य
लाभ10:23 – 11:52शुभ
अमृत11:52 – 13:20शुभ
काल13:20 – 14:48टालें
शुभ14:48 – 16:17शुभ
रोग16:17 – 17:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:45 – 19:17टालें
लाभ19:17 – 20:49शुभ
उद्वेग20:49 – 22:20टालें
शुभ22:20 – 23:52शुभ
अमृत23:52 – 01:23शुभ
चर01:23 – 02:55सामान्य
रोग02:55 – 04:27टालें
काल04:27 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5806:57दिन
सूर्य06:5707:56दिन
शुक्र07:5608:55दिन
बुध08:5509:54दिन
चंद्र09:5410:53दिन
शनि10:5311:52दिन
गुरु11:5212:51दिन
मंगल12:5113:50दिन
सूर्य13:5014:48दिन
शुक्र14:4815:47दिन
बुध15:4716:46दिन
चंद्र16:4617:45दिन
शनि17:4518:46रात
गुरु18:4619:48रात
मंगल19:4820:49रात
सूर्य20:4921:50रात
शुक्र21:5022:51रात
बुध22:5123:52रात
चंद्र23:5200:53रात
शनि00:5301:54रात
गुरु01:5402:55रात
मंगल02:5503:56रात
सूर्य03:5604:57रात
शुक्र04:5705:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां काठमांडू में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2448° (लाहिड़ी)। समय काठमांडू (Asia/Kathmandu) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।