12 नवंबर 2029 को काठमांडू का पंचांग

सोमवार, 12 नवंबर 2029, काठमांडू, नेपाल। समय Asia/Kathmandu में है।

सोमवार, 12 नवंबर 2029 को काठमांडू में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (18:10 तक), नक्षत्र श्रवण (00:08, 13 नव॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 07:43 से 09:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:12
रात 06:23 तक
तिथि
सप्तमी, 18:10 तक
अष्टमी
नक्षत्र
श्रवण, 00:08 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 नवंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 18:10 तक
शुक्ल अष्टमी 18:40, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 00:08, 13 नव॰ तक
धनिष्ठा 01:23, 14 नव॰ तक
योग
गंडअशुभ 13:09 तक
वृद्धि 12:15, 13 नव॰ तक
करण
वणिज 18:10 तक
विष्टि (भद्रा) 06:20, 13 नव॰ तक
बव 18:40, 13 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
11:57
चंद्रास्त
23:22
दिनमान
10h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
07:43 – 09:05
यमगंड
10:26 – 11:47
गुलिक काल
13:09 – 14:30

12 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:22 – 07:43शुभ
काल07:43 – 09:05टालें
शुभ09:05 – 10:26शुभ
रोग10:26 – 11:47टालें
उद्वेग11:47 – 13:09टालें
चर13:09 – 14:30सामान्य
लाभ14:30 – 15:51शुभ
अमृत15:51 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:12 – 18:51सामान्य
रोग18:51 – 20:30टालें
काल20:30 – 22:09टालें
लाभ22:09 – 23:48शुभ
उद्वेग23:48 – 01:26टालें
शुभ01:26 – 03:05शुभ
अमृत03:05 – 04:44शुभ
चर04:44 – 06:23सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2207:16दिन
शनि07:1608:10दिन
गुरु08:1009:05दिन
मंगल09:0509:59दिन
सूर्य09:5910:53दिन
शुक्र10:5311:47दिन
बुध11:4712:41दिन
चंद्र12:4113:36दिन
शनि13:3614:30दिन
गुरु14:3015:24दिन
मंगल15:2416:18दिन
सूर्य16:1817:12दिन
शुक्र17:1218:18रात
बुध18:1819:24रात
चंद्र19:2420:30रात
शनि20:3021:36रात
गुरु21:3622:42रात
मंगल22:4223:48रात
सूर्य23:4800:53रात
शुक्र00:5301:59रात
बुध01:5903:05रात
चंद्र03:0504:11रात
शनि04:1105:17रात
गुरु05:1706:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां काठमांडू में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2742° (लाहिड़ी)। समय काठमांडू (Asia/Kathmandu) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।