3 मार्च 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

सोमवार, 3 मार्च 2025, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 मार्च 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (18:02 तक), नक्षत्र अश्विनी (04:29, 4 मार्च तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 08:22 से 09:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 18:28
रात 06:54 तक
तिथि
चतुर्थी, 18:02 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 04:29 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:02 तक
शुक्ल पंचमी 15:17, 4 मार्च तक
नक्षत्र
अश्विनी 04:29, 4 मार्च तक
भरणी 02:37, 5 मार्च तक
योग
शुक्ल 08:57 तक
ब्रह्म 05:24, 4 मार्च तक
इंद्र 02:06, 5 मार्च तक
करण
वणिज 07:31 तक
विष्टि (भद्रा) 18:02 तक
बव 04:37, 4 मार्च तक
बालव 15:17, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
08:45
चंद्रास्त
22:26
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
08:22 – 09:49
यमगंड
11:15 – 12:42
गुलिक काल
14:09 – 15:35

3 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:55 – 08:22शुभ
काल08:22 – 09:49टालें
शुभ09:49 – 11:15शुभ
रोग11:15 – 12:42टालें
उद्वेग12:42 – 14:09टालें
चर14:09 – 15:35सामान्य
लाभ15:35 – 17:02शुभ
अमृत17:02 – 18:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:28 – 20:02सामान्य
रोग20:02 – 21:35टालें
काल21:35 – 23:08टालें
लाभ23:08 – 00:41शुभ
उद्वेग00:41 – 02:15टालें
शुभ02:15 – 03:48शुभ
अमृत03:48 – 05:21शुभ
चर05:21 – 06:54सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5507:53दिन
शनि07:5308:51दिन
गुरु08:5109:49दिन
मंगल09:4910:46दिन
सूर्य10:4611:44दिन
शुक्र11:4412:42दिन
बुध12:4213:40दिन
चंद्र13:4014:37दिन
शनि14:3715:35दिन
गुरु15:3516:33दिन
मंगल16:3317:31दिन
सूर्य17:3118:28दिन
शुक्र18:2819:31रात
बुध19:3120:33रात
चंद्र20:3321:35रात
शनि21:3522:37रात
गुरु22:3723:39रात
मंगल23:3900:41रात
सूर्य00:4101:43रात
शुक्र01:4302:46रात
बुध02:4603:48रात
चंद्र03:4804:50रात
शनि04:5005:52रात
गुरु05:5206:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2086° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।