21 मार्च 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

शुक्रवार, 21 मार्च 2025, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 मार्च 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (04:24, 22 मार्च तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (01:45, 22 मार्च तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 18:42 पर है। राहुकाल 11:06 से 12:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 18:42
रात 06:31 तक
तिथि
सप्तमी, 04:24 तक
अष्टमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 01:45 तक
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 मार्च 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 04:24, 22 मार्च तक
कृष्ण अष्टमी 05:23, 23 मार्च तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 01:45, 22 मार्च तक
मूल 03:23, 23 मार्च तक
योग
सिद्धि 18:41 तक
व्यतीपातअशुभ 18:36, 22 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:39 तक
बव 04:24, 22 मार्च तक
बालव 16:59, 22 मार्च तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 01:45, 22 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
18:42
चंद्रोदय
00:30
चंद्रास्त
10:11
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:01

अशुभ समय

राहुकाल
11:06 – 12:37
यमगंड
15:40 – 17:11
गुलिक काल
08:04 – 09:35

21 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:32 – 08:04सामान्य
लाभ08:04 – 09:35शुभ
अमृत09:35 – 11:06शुभ
काल11:06 – 12:37टालें
शुभ12:37 – 14:08शुभ
रोग14:08 – 15:40टालें
उद्वेग15:40 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:42सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:42 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:39टालें
लाभ21:39 – 23:08शुभ
उद्वेग23:08 – 00:36टालें
शुभ00:36 – 02:05शुभ
अमृत02:05 – 03:34शुभ
चर03:34 – 05:02सामान्य
रोग05:02 – 06:31टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3207:33दिन
बुध07:3308:34दिन
चंद्र08:3409:35दिन
शनि09:3510:36दिन
गुरु10:3611:36दिन
मंगल11:3612:37दिन
सूर्य12:3713:38दिन
शुक्र13:3814:39दिन
बुध14:3915:40दिन
चंद्र15:4016:40दिन
शनि16:4017:41दिन
गुरु17:4118:42दिन
मंगल18:4219:41रात
सूर्य19:4120:40रात
शुक्र20:4021:39रात
बुध21:3922:38रात
चंद्र22:3823:37रात
शनि23:3700:36रात
गुरु00:3601:36रात
मंगल01:3602:35रात
सूर्य02:3503:34रात
शुक्र03:3404:33रात
बुध04:3305:32रात
चंद्र05:3206:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2093° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।