15 सितंबर 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

सोमवार, 15 सितंबर 2025, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 सितंबर 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (01:31, 16 सित॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (07:31 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 07:46 से 09:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:36
रात 06:14 तक
तिथि
नवमी, 01:31 तक
दशमी
नक्षत्र
आर्द्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 01:31, 16 सित॰ तक
कृष्ण दशमी 00:22, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 06:46, 16 सित॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 02:34, 16 सित॰ तक
वरीयान 00:34, 17 सित॰ तक
करण
तैतिल 14:16 तक
गर 01:31, 16 सित॰ तक
वणिज 12:53, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
14:35
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
07:46 – 09:19
यमगंड
10:52 – 12:25
गुलिक काल
13:58 – 15:30

15 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:13 – 07:46शुभ
काल07:46 – 09:19टालें
शुभ09:19 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:25टालें
उद्वेग12:25 – 13:58टालें
चर13:58 – 15:30सामान्य
लाभ15:30 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:36 – 20:03सामान्य
रोग20:03 – 21:31टालें
काल21:31 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:25शुभ
उद्वेग00:25 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:19शुभ
अमृत03:19 – 04:47शुभ
चर04:47 – 06:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1307:15दिन
शनि07:1508:17दिन
गुरु08:1709:19दिन
मंगल09:1910:21दिन
सूर्य10:2111:23दिन
शुक्र11:2312:25दिन
बुध12:2513:27दिन
चंद्र13:2714:29दिन
शनि14:2915:30दिन
गुरु15:3016:32दिन
मंगल16:3217:34दिन
सूर्य17:3418:36दिन
शुक्र18:3619:34रात
बुध19:3420:32रात
चंद्र20:3221:31रात
शनि21:3122:29रात
गुरु22:2923:27रात
मंगल23:2700:25रात
सूर्य00:2501:23रात
शुक्र01:2302:21रात
बुध02:2103:19रात
चंद्र03:1904:18रात
शनि04:1805:16रात
गुरु05:1606:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2161° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।