29 अक्टूबर 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (09:23 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (17:30 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 12:13 से 13:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:41
रात 06:46 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 17:30 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 09:23 तक
शुक्ल अष्टमी 10:07, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:33, 30 अक्टू॰ तक
योग
धृति 07:51 तक
शूलअशुभ 07:20, 30 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 09:23 तक
विष्टि (भद्रा) 21:50 तक
बव 10:07, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
13:24
चंद्रास्त
23:39
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:01 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:13 – 13:35
यमगंड
08:07 – 09:29
गुलिक काल
10:51 – 12:13

29 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:45 – 08:07शुभ
अमृत08:07 – 09:29शुभ
काल09:29 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:13शुभ
रोग12:13 – 13:35टालें
उद्वेग13:35 – 14:57टालें
चर14:57 – 16:19सामान्य
लाभ16:19 – 17:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:41 – 19:19टालें
शुभ19:19 – 20:58शुभ
अमृत20:58 – 22:36शुभ
चर22:36 – 00:14सामान्य
रोग00:14 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:30टालें
लाभ03:30 – 05:08शुभ
उद्वेग05:08 – 06:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4507:40दिन
चंद्र07:4008:35दिन
शनि08:3509:29दिन
गुरु09:2910:24दिन
मंगल10:2411:19दिन
सूर्य11:1912:13दिन
शुक्र12:1313:08दिन
बुध13:0814:03दिन
चंद्र14:0314:57दिन
शनि14:5715:52दिन
गुरु15:5216:47दिन
मंगल16:4717:41दिन
सूर्य17:4118:47रात
शुक्र18:4719:52रात
बुध19:5220:58रात
चंद्र20:5822:03रात
शनि22:0323:08रात
गुरु23:0800:14रात
मंगल00:1401:19रात
सूर्य01:1902:24रात
शुक्र02:2403:30रात
बुध03:3004:35रात
चंद्र04:3505:41रात
शनि05:4106:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2178° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।