2 जनवरी 2028 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

रविवार, 2 जनवरी 2028, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 जनवरी 2028 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (13:40 तक), नक्षत्र शतभिषा (19:22 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:33 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 16:19 से 17:34 तक है।

दिन और रात
दिन 07:33 – 17:34
रात 07:33 तक
तिथि
पंचमी, 13:40 तक
षष्ठी
नक्षत्र
शतभिषा, 19:22 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जनवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:40 तक
शुक्ल षष्ठी 16:12, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 19:22 तक
योग
सिद्धि 11:42 तक
व्यतीपातअशुभ 12:33, 3 जन॰ तक
करण
बालव 13:40 तक
कौलव 02:58, 3 जन॰ तक
तैतिल 16:12, 3 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:33
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
10:38
चंद्रास्त
22:38
दिनमान
10h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:41 – 06:37
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
16:19 – 17:34
यमगंड
12:34 – 13:49
गुलिक काल
15:04 – 16:19

2 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:33 – 08:48टालें
चर08:48 – 10:03सामान्य
लाभ10:03 – 11:18शुभ
अमृत11:18 – 12:34शुभ
काल12:34 – 13:49टालें
शुभ13:49 – 15:04शुभ
रोग15:04 – 16:19टालें
उद्वेग16:19 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:34 – 19:19शुभ
अमृत19:19 – 21:04शुभ
चर21:04 – 22:49सामान्य
रोग22:49 – 00:34टालें
काल00:34 – 02:18टालें
लाभ02:18 – 04:03शुभ
उद्वेग04:03 – 05:48टालें
शुभ05:48 – 07:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:3308:23दिन
शुक्र08:2309:13दिन
बुध09:1310:03दिन
चंद्र10:0310:53दिन
शनि10:5311:43दिन
गुरु11:4312:34दिन
मंगल12:3413:24दिन
सूर्य13:2414:14दिन
शुक्र14:1415:04दिन
बुध15:0415:54दिन
चंद्र15:5416:44दिन
शनि16:4417:34दिन
गुरु17:3418:44रात
मंगल18:4419:54रात
सूर्य19:5421:04रात
शुक्र21:0422:14रात
बुध22:1423:24रात
चंद्र23:2400:34रात
शनि00:3401:44रात
गुरु01:4402:53रात
मंगल02:5304:03रात
सूर्य04:0305:13रात
शुक्र05:1306:23रात
बुध06:2307:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2482° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।