1 सितंबर 2028 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (00:35, 2 सित॰ तक), नक्षत्र श्रवण (04:03, 2 सित॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 10:53 से 12:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:54
रात 06:05 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:35 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
श्रवण, 04:03 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 00:35, 2 सित॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:52, 3 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 04:03, 2 सित॰ तक
धनिष्ठा 06:55, 3 सित॰ तक
योग
शोभन 23:35 तक
अतिगंडअशुभ 00:24, 3 सित॰ तक
करण
कौलव 11:31 तक
तैतिल 00:35, 2 सित॰ तक
गर 13:42, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
17:24
चंद्रास्त
03:28
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
10:53 – 12:29
यमगंड
15:42 – 17:18
गुलिक काल
07:41 – 09:17

1 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:04 – 07:41सामान्य
लाभ07:41 – 09:17शुभ
अमृत09:17 – 10:53शुभ
काल10:53 – 12:29टालें
शुभ12:29 – 14:06शुभ
रोग14:06 – 15:42टालें
उद्वेग15:42 – 17:18टालें
चर17:18 – 18:54सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:54 – 20:18टालें
काल20:18 – 21:42टालें
लाभ21:42 – 23:06शुभ
उद्वेग23:06 – 00:30टालें
शुभ00:30 – 01:54शुभ
अमृत01:54 – 03:17शुभ
चर03:17 – 04:41सामान्य
रोग04:41 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0407:09दिन
बुध07:0908:13दिन
चंद्र08:1309:17दिन
शनि09:1710:21दिन
गुरु10:2111:25दिन
मंगल11:2512:29दिन
सूर्य12:2913:34दिन
शुक्र13:3414:38दिन
बुध14:3815:42दिन
चंद्र15:4216:46दिन
शनि16:4617:50दिन
गुरु17:5018:54दिन
मंगल18:5419:50रात
सूर्य19:5020:46रात
शुक्र20:4621:42रात
बुध21:4222:38रात
चंद्र22:3823:34रात
शनि23:3400:30रात
गुरु00:3001:26रात
मंगल01:2602:22रात
सूर्य02:2203:17रात
शुक्र03:1704:13रात
बुध04:1305:09रात
चंद्र05:0906:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2575° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।