11 फ़रवरी 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

रविवार, 11 फ़रवरी 2029, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 11 फ़रवरी 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:30 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (23:48 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:17 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 16:50 से 18:11 तक है।

दिन और रात
दिन 07:17 – 18:11
रात 07:16 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:30 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 23:48 तक
श्रवण
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:30 तक
कृष्ण चतुर्दशी 14:34, 12 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 01:34, 13 फ़र॰ तक
योग
सिद्धि 13:42 तक
व्यतीपातअशुभ 13:23, 12 फ़र॰ तक
करण
वणिज 13:30 तक
विष्टि (भद्रा) 01:59, 12 फ़र॰ तक
शकुनि 14:34, 12 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:17
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
05:46
चंद्रास्त
16:20
दिनमान
10h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:32 – 06:25
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
16:50 – 18:11
यमगंड
12:44 – 14:06
गुलिक काल
15:28 – 16:50

11 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:17 – 08:39टालें
चर08:39 – 10:01सामान्य
लाभ10:01 – 11:22शुभ
अमृत11:22 – 12:44शुभ
काल12:44 – 14:06टालें
शुभ14:06 – 15:28शुभ
रोग15:28 – 16:50टालें
उद्वेग16:50 – 18:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:11 – 19:49शुभ
अमृत19:49 – 21:28शुभ
चर21:28 – 23:06सामान्य
रोग23:06 – 00:44टालें
काल00:44 – 02:22टालें
लाभ02:22 – 04:00शुभ
उद्वेग04:00 – 05:38टालें
शुभ05:38 – 07:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1708:12दिन
शुक्र08:1209:06दिन
बुध09:0610:01दिन
चंद्र10:0110:55दिन
शनि10:5511:50दिन
गुरु11:5012:44दिन
मंगल12:4413:39दिन
सूर्य13:3914:33दिन
शुक्र14:3315:28दिन
बुध15:2816:22दिन
चंद्र16:2217:17दिन
शनि17:1718:11दिन
गुरु18:1119:17रात
मंगल19:1720:22रात
सूर्य20:2221:28रात
शुक्र21:2822:33रात
बुध22:3323:38रात
चंद्र23:3800:44रात
शनि00:4401:49रात
गुरु01:4902:54रात
मंगल02:5404:00रात
सूर्य04:0005:05रात
शुक्र05:0506:11रात
बुध06:1107:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2638° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।