9 मार्च 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

शुक्रवार, 9 मार्च 2029, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 9 मार्च 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (01:17, 10 मार्च तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (03:58, 10 मार्च तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 18:33 पर है। राहुकाल 11:12 से 12:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 18:33
रात 06:47 तक
तिथि
दशमी, 01:17 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 03:58 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मार्च 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 01:17, 10 मार्च तक
कृष्ण एकादशी 02:16, 11 मार्च तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 03:58, 10 मार्च तक
उत्तराषाढ़ा 05:34, 11 मार्च तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:32 तक
वरीयान 18:05, 10 मार्च तक
करण
वणिज 12:59 तक
विष्टि (भद्रा) 01:17, 10 मार्च तक
बव 13:43, 10 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
18:33
चंद्रोदय
03:02
चंद्रास्त
13:14
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
11:12 – 12:40
यमगंड
15:37 – 17:05
गुलिक काल
08:16 – 09:44

9 मार्च 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:48 – 08:16सामान्य
लाभ08:16 – 09:44शुभ
अमृत09:44 – 11:12शुभ
काल11:12 – 12:40टालें
शुभ12:40 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:37टालें
उद्वेग15:37 – 17:05टालें
चर17:05 – 18:33सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:33 – 20:05टालें
काल20:05 – 21:36टालें
लाभ21:36 – 23:08शुभ
उद्वेग23:08 – 00:40टालें
शुभ00:40 – 02:12शुभ
अमृत02:12 – 03:43शुभ
चर03:43 – 05:15सामान्य
रोग05:15 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4807:47दिन
बुध07:4708:45दिन
चंद्र08:4509:44दिन
शनि09:4410:43दिन
गुरु10:4311:42दिन
मंगल11:4212:40दिन
सूर्य12:4013:39दिन
शुक्र13:3914:38दिन
बुध14:3815:37दिन
चंद्र15:3716:36दिन
शनि16:3617:34दिन
गुरु17:3418:33दिन
मंगल18:3319:34रात
सूर्य19:3420:35रात
शुक्र20:3521:36रात
बुध21:3622:38रात
चंद्र22:3823:39रात
शनि23:3900:40रात
गुरु00:4001:41रात
मंगल01:4102:42रात
सूर्य02:4203:43रात
शुक्र03:4304:44रात
बुध04:4405:45रात
चंद्र05:4506:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 मार्च 2029अधिक चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 अप्रैल 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अप्रैल 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2648° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।