14 नवंबर 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) का पंचांग

बुधवार, 14 नवंबर 2029, कटरा (वैष्णो देवी), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 नवंबर 2029 को कटरा (वैष्णो देवी) में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (19:35 तक), नक्षत्र शतभिषा (03:00, 15 नव॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 12:14 से 13:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 17:29
रात 07:00 तक
तिथि
नवमी, 19:35 तक
दशमी
नक्षत्र
शतभिषा, 03:00 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 19:35 तक
शुक्ल दशमी 21:19, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 03:00, 15 नव॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 05:21, 16 नव॰ तक
योग
ध्रुव 11:38 तक
व्याघातअशुभ 11:44, 15 नव॰ तक
करण
कौलव 19:35 तक
तैतिल 08:24, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
13:35
चंद्रास्त
00:43
दिनमान
10h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:14 – 13:33
यमगंड
08:18 – 09:37
गुलिक काल
10:55 – 12:14

14 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:59 – 08:18शुभ
अमृत08:18 – 09:37शुभ
काल09:37 – 10:55टालें
शुभ10:55 – 12:14शुभ
रोग12:14 – 13:33टालें
उद्वेग13:33 – 14:51टालें
चर14:51 – 16:10सामान्य
लाभ16:10 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:29 – 19:10टालें
शुभ19:10 – 20:52शुभ
अमृत20:52 – 22:33शुभ
चर22:33 – 00:14सामान्य
रोग00:14 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:37टालें
लाभ03:37 – 05:19शुभ
उद्वेग05:19 – 07:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5907:52दिन
चंद्र07:5208:44दिन
शनि08:4409:37दिन
गुरु09:3710:29दिन
मंगल10:2911:22दिन
सूर्य11:2212:14दिन
शुक्र12:1413:06दिन
बुध13:0613:59दिन
चंद्र13:5914:51दिन
शनि14:5115:44दिन
गुरु15:4416:36दिन
मंगल16:3617:29दिन
सूर्य17:2918:36रात
शुक्र18:3619:44रात
बुध19:4420:52रात
चंद्र20:5221:59रात
शनि21:5923:07रात
गुरु23:0700:14रात
मंगल00:1401:22रात
सूर्य01:2202:30रात
शुक्र02:3003:37रात
बुध03:3704:45रात
चंद्र04:4505:53रात
शनि05:5307:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटरा (वैष्णो देवी) में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2743° (लाहिड़ी)। समय कटरा (वैष्णो देवी) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।