15 सितंबर 2026 को कोल्हापुर का पंचांग

मंगलवार, 15 सितंबर 2026, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (07:44 तक), नक्षत्र स्वाति (15:21 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:21 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 15:31 से 17:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:21 – 18:35
रात 06:21 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
स्वाति, 15:21 तक
विशाखा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:44 तक
शुक्ल पंचमी 08:59, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 15:21 तक
विशाखा 17:22, 16 सित॰ तक
योग
इंद्र 12:20 तक
वैधृतिअशुभ 12:22, 16 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:44 तक
बव 20:17 तक
बालव 08:59, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:21
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
09:51
चंद्रास्त
21:19
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:34
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
15:31 – 17:03
यमगंड
09:24 – 10:56
गुलिक काल
12:28 – 13:59

15 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:21 – 07:53टालें
उद्वेग07:53 – 09:24टालें
चर09:24 – 10:56सामान्य
लाभ10:56 – 12:28शुभ
अमृत12:28 – 13:59शुभ
काल13:59 – 15:31टालें
शुभ15:31 – 17:03शुभ
रोग17:03 – 18:35टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:35 – 20:03टालें
लाभ20:03 – 21:31शुभ
उद्वेग21:31 – 23:00टालें
शुभ23:00 – 00:28शुभ
अमृत00:28 – 01:56शुभ
चर01:56 – 03:24सामान्य
रोग03:24 – 04:53टालें
काल04:53 – 06:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2107:22दिन
सूर्य07:2208:23दिन
शुक्र08:2309:24दिन
बुध09:2410:25दिन
चंद्र10:2511:27दिन
शनि11:2712:28दिन
गुरु12:2813:29दिन
मंगल13:2914:30दिन
सूर्य14:3015:31दिन
शुक्र15:3116:32दिन
बुध16:3217:34दिन
चंद्र17:3418:35दिन
शनि18:3519:34रात
गुरु19:3420:32रात
मंगल20:3221:31रात
सूर्य21:3122:30रात
शुक्र22:3023:29रात
बुध23:2900:28रात
चंद्र00:2801:27रात
शनि01:2702:25रात
गुरु02:2503:24रात
मंगल03:2404:23रात
सूर्य04:2305:22रात
शुक्र05:2206:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2301° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।