28 फ़रवरी 2027 को कोल्हापुर का पंचांग

रविवार, 28 फ़रवरी 2027, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 28 फ़रवरी 2027 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (23:46 तक), नक्षत्र अनुराधा (13:47 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:51 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 17:11 से 18:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:51 – 18:39
रात 06:51 तक
तिथि
अष्टमी, 23:46 तक
नवमी
नक्षत्र
अनुराधा, 13:47 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 23:46 तक
कृष्ण नवमी 02:07, 2 मार्च तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 16:27, 1 मार्च तक
योग
हर्षण 22:28 तक
वज्रअशुभ 23:11, 1 मार्च तक
करण
बालव 10:46 तक
कौलव 23:46 तक
तैतिल 12:54, 1 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:51
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
00:42
चंद्रास्त
11:56
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:09

अशुभ समय

राहुकाल
17:11 – 18:39
यमगंड
12:45 – 14:14
गुलिक काल
15:42 – 17:11

28 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:51 – 08:20टालें
चर08:20 – 09:48सामान्य
लाभ09:48 – 11:17शुभ
अमृत11:17 – 12:45शुभ
काल12:45 – 14:14टालें
शुभ14:14 – 15:42शुभ
रोग15:42 – 17:11टालें
उद्वेग17:11 – 18:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:39 – 20:11शुभ
अमृत20:11 – 21:42शुभ
चर21:42 – 23:13सामान्य
रोग23:13 – 00:45टालें
काल00:45 – 02:16टालें
लाभ02:16 – 03:48शुभ
उद्वेग03:48 – 05:19टालें
शुभ05:19 – 06:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5107:50दिन
शुक्र07:5008:49दिन
बुध08:4909:48दिन
चंद्र09:4810:47दिन
शनि10:4711:46दिन
गुरु11:4612:45दिन
मंगल12:4513:44दिन
सूर्य13:4414:43दिन
शुक्र14:4315:42दिन
बुध15:4216:41दिन
चंद्र16:4117:40दिन
शनि17:4018:39दिन
गुरु18:3919:40रात
मंगल19:4020:41रात
सूर्य20:4121:42रात
शुक्र21:4222:43रात
बुध22:4323:44रात
चंद्र23:4400:45रात
शनि00:4501:46रात
गुरु01:4602:47रात
मंगल02:4703:48रात
सूर्य03:4804:49रात
शुक्र04:4905:50रात
बुध05:5006:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2364° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।