18 फ़रवरी 2028 को कोल्हापुर का पंचांग

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2028, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2028 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (02:24, 19 फ़र॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (13:25 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 18:36 पर है। राहुकाल 11:19 से 12:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 18:36
रात 06:57 तक
तिथि
नवमी, 02:24 तक
दशमी
नक्षत्र
अनुराधा, 13:25 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 02:24, 19 फ़र॰ तक
कृष्ण दशमी 03:48, 20 फ़र॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 15:01, 19 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 16:29 तक
हर्षण 16:13, 19 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 13:57 तक
गर 02:24, 19 फ़र॰ तक
वणिज 15:01, 19 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
18:36
चंद्रोदय
01:23
चंद्रास्त
12:40
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
11:19 – 12:47
यमगंड
15:41 – 17:09
गुलिक काल
08:25 – 09:52

18 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:57 – 08:25सामान्य
लाभ08:25 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:19शुभ
काल11:19 – 12:47टालें
शुभ12:47 – 14:14शुभ
रोग14:14 – 15:41टालें
उद्वेग15:41 – 17:09टालें
चर17:09 – 18:36सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:36 – 20:08टालें
काल20:08 – 21:41टालें
लाभ21:41 – 23:14शुभ
उद्वेग23:14 – 00:46टालें
शुभ00:46 – 02:19शुभ
अमृत02:19 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:24सामान्य
रोग05:24 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5707:56दिन
बुध07:5608:54दिन
चंद्र08:5409:52दिन
शनि09:5210:50दिन
गुरु10:5011:48दिन
मंगल11:4812:47दिन
सूर्य12:4713:45दिन
शुक्र13:4514:43दिन
बुध14:4315:41दिन
चंद्र15:4116:39दिन
शनि16:3917:38दिन
गुरु17:3818:36दिन
मंगल18:3619:38रात
सूर्य19:3820:39रात
शुक्र20:3921:41रात
बुध21:4122:43रात
चंद्र22:4323:45रात
शनि23:4500:46रात
गुरु00:4601:48रात
मंगल01:4802:50रात
सूर्य02:5003:52रात
शुक्र03:5204:53रात
बुध04:5305:55रात
चंद्र05:5506:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2500° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।