7 जनवरी 2029 को कोल्हापुर का पंचांग

रविवार, 7 जनवरी 2029, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 जनवरी 2029 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (08:00 तक), नक्षत्र हस्त (19:02 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 16:51 से 18:15 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 18:15
रात 07:04 तक
तिथि
अष्टमी, 05:54 तक
नवमी
नक्षत्र
हस्त, 19:02 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जनवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 08:00 तक
कृष्ण अष्टमी 05:54, 8 जन॰ तक
कृष्ण नवमी 04:00, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 19:02 तक
चित्रा 17:43, 8 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:25, 8 जन॰ तक
सुकर्मा 21:36, 8 जन॰ तक
करण
बव 08:00 तक
बालव 18:56 तक
कौलव 05:54, 8 जन॰ तक
तैतिल 16:56, 8 जन॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 06:21, 8 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:52
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:01

अशुभ समय

राहुकाल
16:51 – 18:15
यमगंड
12:39 – 14:03
गुलिक काल
15:27 – 16:51

7 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:03 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:51सामान्य
लाभ09:51 – 11:15शुभ
अमृत11:15 – 12:39शुभ
काल12:39 – 14:03टालें
शुभ14:03 – 15:27शुभ
रोग15:27 – 16:51टालें
उद्वेग16:51 – 18:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:15 – 19:51शुभ
अमृत19:51 – 21:27शुभ
चर21:27 – 23:03सामान्य
रोग23:03 – 00:39टालें
काल00:39 – 02:15टालें
लाभ02:15 – 03:51शुभ
उद्वेग03:51 – 05:27टालें
शुभ05:27 – 07:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0307:59दिन
शुक्र07:5908:55दिन
बुध08:5509:51दिन
चंद्र09:5110:47दिन
शनि10:4711:43दिन
गुरु11:4312:39दिन
मंगल12:3913:35दिन
सूर्य13:3514:31दिन
शुक्र14:3115:27दिन
बुध15:2716:23दिन
चंद्र16:2317:19दिन
शनि17:1918:15दिन
गुरु18:1519:19रात
मंगल19:1920:23रात
सूर्य20:2321:27रात
शुक्र21:2722:31रात
बुध22:3123:35रात
चंद्र23:3500:39रात
शनि00:3901:43रात
गुरु01:4302:47रात
मंगल02:4703:51रात
सूर्य03:5104:55रात
शुक्र04:5505:59रात
बुध05:5907:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2624° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।