12 सितंबर 2029 को कोल्हापुर का पंचांग

बुधवार, 12 सितंबर 2029, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 सितंबर 2029 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (00:05, 13 सित॰ तक), नक्षत्र स्वाति (14:10 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 12:29 से 14:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:37
रात 06:21 तक
तिथि
पंचमी, 00:05 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 14:10 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 00:05, 13 सित॰ तक
शुक्ल षष्ठी 21:40, 13 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 14:10 तक
विशाखा 12:19, 13 सित॰ तक
योग
इंद्र 15:49 तक
वैधृतिअशुभ 12:34, 13 सित॰ तक
करण
बव 13:28 तक
बालव 00:05, 13 सित॰ तक
कौलव 10:49, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
10:03
चंद्रास्त
21:40
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:34
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:29 – 14:01
यमगंड
07:53 – 09:25
गुलिक काल
10:57 – 12:29

12 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:20 – 07:53शुभ
अमृत07:53 – 09:25शुभ
काल09:25 – 10:57टालें
शुभ10:57 – 12:29शुभ
रोग12:29 – 14:01टालें
उद्वेग14:01 – 15:33टालें
चर15:33 – 17:05सामान्य
लाभ17:05 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:37 – 20:05टालें
शुभ20:05 – 21:33शुभ
अमृत21:33 – 23:01शुभ
चर23:01 – 00:29सामान्य
रोग00:29 – 01:57टालें
काल01:57 – 03:25टालें
लाभ03:25 – 04:53शुभ
उद्वेग04:53 – 06:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2007:22दिन
चंद्र07:2208:23दिन
शनि08:2309:25दिन
गुरु09:2510:26दिन
मंगल10:2611:27दिन
सूर्य11:2712:29दिन
शुक्र12:2913:30दिन
बुध13:3014:31दिन
चंद्र14:3115:33दिन
शनि15:3316:34दिन
गुरु16:3417:36दिन
मंगल17:3618:37दिन
सूर्य18:3719:36रात
शुक्र19:3620:34रात
बुध20:3421:33रात
चंद्र21:3322:31रात
शनि22:3123:30रात
गुरु23:3000:29रात
मंगल00:2901:27रात
सूर्य01:2702:26रात
शुक्र02:2603:25रात
बुध03:2504:23रात
चंद्र04:2305:22रात
शनि05:2206:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2719° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।