18 सितंबर 2001 को कोलकाता का पंचांग

मंगलवार, 18 सितंबर 2001, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 18 सितंबर 2001 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (12:18 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (06:38 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 14:33 से 16:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 17:37
रात 05:24 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:18 तक
द्वितीया
नक्षत्र
हस्त, 04:00 तक
चित्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2001 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 12:18 तक
शुक्ल द्वितीया 08:58, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 04:00, 19 सित॰ तक
चित्रा 01:51, 20 सित॰ तक
योग
शुक्ल 19:39 तक
ब्रह्म 15:56, 19 सित॰ तक
करण
बव 12:18 तक
बालव 22:35 तक
कौलव 08:58, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
06:04
चंद्रास्त
18:35
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
अधिक आश्विन
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:33 – 16:05
यमगंड
08:27 – 09:58
गुलिक काल
11:30 – 13:02

18 सितंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:24 – 06:55टालें
उद्वेग06:55 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:58सामान्य
लाभ09:58 – 11:30शुभ
अमृत11:30 – 13:02शुभ
काल13:02 – 14:33टालें
शुभ14:33 – 16:05शुभ
रोग16:05 – 17:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:37 – 19:05टालें
लाभ19:05 – 20:33शुभ
उद्वेग20:33 – 22:02टालें
शुभ22:02 – 23:30शुभ
अमृत23:30 – 00:59शुभ
चर00:59 – 02:27सामान्य
रोग02:27 – 03:55टालें
काल03:55 – 05:24टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2406:25दिन
सूर्य06:2507:26दिन
शुक्र07:2608:27दिन
बुध08:2709:28दिन
चंद्र09:2810:29दिन
शनि10:2911:30दिन
गुरु11:3012:31दिन
मंगल12:3113:32दिन
सूर्य13:3214:33दिन
शुक्र14:3315:34दिन
बुध15:3416:36दिन
चंद्र16:3617:37दिन
शनि17:3718:36रात
गुरु18:3619:34रात
मंगल19:3420:33रात
सूर्य20:3321:32रात
शुक्र21:3222:31रात
बुध22:3123:30रात
चंद्र23:3000:29रात
शनि00:2901:28रात
गुरु01:2802:27रात
मंगल02:2703:26रात
सूर्य03:2604:25रात
शुक्र04:2505:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 सित॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अक्टू॰ 2001अधिक आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
6 अक्टू॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अक्टू॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 अक्टू॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2001अधिक आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2001तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8810° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।