28 सितंबर 2002 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 28 सितंबर 2002, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 28 सितंबर 2002 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (09:12 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:56 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:27
रात 05:27 तक
तिथि
षष्ठी, 09:12 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रोहिणी, 09:56 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2002 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 09:12 तक
कृष्ण सप्तमी 10:17, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:56 तक
मृगशिरा 11:34, 29 सित॰ तक
योग
सिद्धि 08:09 तक
व्यतीपातअशुभ 07:59, 29 सित॰ तक
करण
वणिज 09:12 तक
विष्टि (भद्रा) 21:50 तक
बव 10:17, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 22:50 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
21:55
चंद्रास्त
10:56
दिनमान
12h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:57
यमगंड
12:57 – 14:27
गुलिक काल
05:26 – 06:56

28 सितंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:26 – 06:56टालें
शुभ06:56 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:57टालें
उद्वेग09:57 – 11:27टालें
चर11:27 – 12:57सामान्य
लाभ12:57 – 14:27शुभ
अमृत14:27 – 15:57शुभ
काल15:57 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:27 – 18:57शुभ
उद्वेग18:57 – 20:27टालें
शुभ20:27 – 21:57शुभ
अमृत21:57 – 23:27शुभ
चर23:27 – 00:57सामान्य
रोग00:57 – 02:27टालें
काल02:27 – 03:57टालें
लाभ03:57 – 05:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2606:26दिन
गुरु06:2607:26दिन
मंगल07:2608:27दिन
सूर्य08:2709:27दिन
शुक्र09:2710:27दिन
बुध10:2711:27दिन
चंद्र11:2712:27दिन
शनि12:2713:27दिन
गुरु13:2714:27दिन
मंगल14:2715:27दिन
सूर्य15:2716:27दिन
शुक्र16:2717:27दिन
बुध17:2718:27रात
चंद्र18:2719:27रात
शनि19:2720:27रात
गुरु20:2721:27रात
मंगल21:2722:27रात
सूर्य22:2723:27रात
शुक्र23:2700:27रात
बुध00:2701:27रात
चंद्र01:2702:27रात
शनि02:2703:27रात
गुरु03:2704:27रात
मंगल04:2705:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 अक्टू॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अक्टू॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2002आश्विन अमावस्याअमावस्या
9 अक्टू॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अक्टू॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2002तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2002आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
25 अक्टू॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8953° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।