9 अक्टूबर 2002 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 9 अक्टूबर 2002, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 अक्टूबर 2002 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (05:58 तक), नक्षत्र विशाखा (15:15 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 11:23 से 12:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:16
रात 05:30 तक
तिथि
चतुर्थी, 03:12 तक
पंचमी
नक्षत्र
विशाखा, 15:15 तक
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2002 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 05:58 तक
शुक्ल चतुर्थी 03:12, 10 अक्टू॰ तक
शुक्ल पंचमी 01:05, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 15:15 तक
अनुराधा 13:31, 10 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 17:15 तक
आयुष्मान 14:07, 10 अक्टू॰ तक
करण
गर 05:58 तक
वणिज 16:30 तक
विष्टि (भद्रा) 03:12, 10 अक्टू॰ तक
बव 14:03, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 09:47 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
08:20
चंद्रास्त
19:42
दिनमान
11h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:47 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:23 – 12:52
यमगंड
06:58 – 08:27
गुलिक काल
09:55 – 11:23

9 अक्टूबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:30 – 06:58शुभ
अमृत06:58 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:23शुभ
रोग11:23 – 12:52टालें
उद्वेग12:52 – 14:20टालें
चर14:20 – 15:48सामान्य
लाभ15:48 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:16 – 18:48टालें
शुभ18:48 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:52शुभ
चर21:52 – 23:23सामान्य
रोग23:23 – 00:55टालें
काल00:55 – 02:27टालें
लाभ02:27 – 03:59शुभ
उद्वेग03:59 – 05:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3006:29दिन
चंद्र06:2907:28दिन
शनि07:2808:27दिन
गुरु08:2709:26दिन
मंगल09:2610:24दिन
सूर्य10:2411:23दिन
शुक्र11:2312:22दिन
बुध12:2213:21दिन
चंद्र13:2114:20दिन
शनि14:2015:19दिन
गुरु15:1916:18दिन
मंगल16:1817:16दिन
सूर्य17:1618:18रात
शुक्र18:1819:19रात
बुध19:1920:20रात
चंद्र20:2021:21रात
शनि21:2122:22रात
गुरु22:2223:23रात
मंगल23:2300:25रात
सूर्य00:2501:26रात
शुक्र01:2602:27रात
बुध02:2703:28रात
चंद्र03:2804:29रात
शनि04:2905:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अक्टू॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अक्टू॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2002तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2002आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
25 अक्टू॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 नव॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 नव॰ 2002कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8957° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।