15 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:32 तक), नक्षत्र हस्त (09:08 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 17:11 पर है। राहुकाल 07:00 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 17:11
रात 05:33 तक
तिथि
अमावस्या, 17:32 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त, 09:08 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
अमावस्या 17:32 तक
शुक्ल प्रतिपदा 14:18, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:08 तक
चित्रा 06:44, 16 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 22:05 तक
विष्कंभअशुभ 18:15, 16 अक्टू॰ तक
करण
चतुष्पद 07:05 तक
नाग 17:32 तक
किंस्तुघ्न 03:56, 16 अक्टू॰ तक
बव 14:18, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 19:58 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
17:11
चंद्रोदय
05:06
चंद्रास्त
16:56
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:45

अशुभ समय

राहुकाल
07:00 – 08:27
यमगंड
09:54 – 11:22
गुलिक काल
12:49 – 14:16

15 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:33 – 07:00शुभ
काल07:00 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:54शुभ
रोग09:54 – 11:22टालें
उद्वेग11:22 – 12:49टालें
चर12:49 – 14:16सामान्य
लाभ14:16 – 15:43शुभ
अमृत15:43 – 17:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:11 – 18:43सामान्य
रोग18:43 – 20:16टालें
काल20:16 – 21:49टालें
लाभ21:49 – 23:22शुभ
उद्वेग23:22 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 04:00शुभ
चर04:00 – 05:33सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3306:31दिन
शनि06:3107:29दिन
गुरु07:2908:27दिन
मंगल08:2709:25दिन
सूर्य09:2510:23दिन
शुक्र10:2311:22दिन
बुध11:2212:20दिन
चंद्र12:2013:18दिन
शनि13:1814:16दिन
गुरु14:1615:14दिन
मंगल15:1416:13दिन
सूर्य16:1317:11दिन
शुक्र17:1118:13रात
बुध18:1319:14रात
चंद्र19:1420:16रात
शनि20:1621:18रात
गुरु21:1822:20रात
मंगल22:2023:22रात
सूर्य23:2200:24रात
शुक्र00:2401:26रात
बुध01:2602:27रात
चंद्र02:2703:29रात
शनि03:2904:31रात
गुरु04:3105:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अक्टू॰ 2012आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2012तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0357° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।