18 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (07:43 तक), नक्षत्र अनुराधा (23:19 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 12:48 से 14:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 17:08
रात 05:34 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:40 तक
पंचमी
नक्षत्र
अनुराधा, 23:19 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:43 तक
शुक्ल चतुर्थी 04:40, 19 अक्टू॰ तक
शुक्ल पंचमी 01:56, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 21:15, 19 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 10:32 तक
सौभाग्य 06:54, 19 अक्टू॰ तक
करण
गर 07:43 तक
वणिज 18:10 तक
विष्टि (भद्रा) 04:40, 19 अक्टू॰ तक
बव 15:15, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
08:22
चंद्रास्त
19:37
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:44

अशुभ समय

राहुकाल
12:48 – 14:15
यमगंड
05:34 – 07:01
गुलिक काल
08:27 – 09:54

18 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:34 – 07:01शुभ
रोग07:01 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:54टालें
चर09:54 – 11:21सामान्य
लाभ11:21 – 12:48शुभ
अमृत12:48 – 14:15शुभ
काल14:15 – 15:41टालें
शुभ15:41 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:08 – 18:41शुभ
चर18:41 – 20:15सामान्य
रोग20:15 – 21:48टालें
काल21:48 – 23:21टालें
लाभ23:21 – 00:54शुभ
उद्वेग00:54 – 02:28टालें
शुभ02:28 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3406:32दिन
मंगल06:3207:30दिन
सूर्य07:3008:27दिन
शुक्र08:2709:25दिन
बुध09:2510:23दिन
चंद्र10:2311:21दिन
शनि11:2112:19दिन
गुरु12:1913:17दिन
मंगल13:1714:15दिन
सूर्य14:1515:12दिन
शुक्र15:1216:10दिन
बुध16:1017:08दिन
चंद्र17:0818:10रात
शनि18:1019:13रात
गुरु19:1320:15रात
मंगल20:1521:17रात
सूर्य21:1722:19रात
शुक्र22:1923:21रात
बुध23:2100:23रात
चंद्र00:2301:26रात
शनि01:2602:28रात
गुरु02:2803:30रात
मंगल03:3004:32रात
सूर्य04:3205:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 अक्टू॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0358° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।