22 सितंबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 22 सितंबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 सितंबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (06:27 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:31 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 12:59 से 14:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 17:32
रात 05:25 तक
तिथि
सप्तमी, 04:19 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 16:31 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2016 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:27 तक
कृष्ण सप्तमी 04:19, 23 सित॰ तक
कृष्ण अष्टमी 02:40, 24 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:31 तक
मृगशिरा 15:21, 23 सित॰ तक
योग
सिद्धि 23:14 तक
व्यतीपातअशुभ 20:42, 23 सित॰ तक
करण
वणिज 06:27 तक
विष्टि (भद्रा) 17:19 तक
बव 04:19, 23 सित॰ तक
बालव 15:26, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 03:52, 23 सित॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
22:20
चंद्रास्त
10:53
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
12:59 – 14:30
यमगंड
05:25 – 06:56
गुलिक काल
08:27 – 09:58

22 सितंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:25 – 06:56शुभ
रोग06:56 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:58टालें
चर09:58 – 11:29सामान्य
लाभ11:29 – 12:59शुभ
अमृत12:59 – 14:30शुभ
काल14:30 – 16:01टालें
शुभ16:01 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:32 – 19:01शुभ
चर19:01 – 20:30सामान्य
रोग20:30 – 22:00टालें
काल22:00 – 23:29टालें
लाभ23:29 – 00:58शुभ
उद्वेग00:58 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2506:25दिन
मंगल06:2507:26दिन
सूर्य07:2608:27दिन
शुक्र08:2709:27दिन
बुध09:2710:28दिन
चंद्र10:2811:29दिन
शनि11:2912:29दिन
गुरु12:2913:30दिन
मंगल13:3014:30दिन
सूर्य14:3015:31दिन
शुक्र15:3116:32दिन
बुध16:3217:32दिन
चंद्र17:3218:32रात
शनि18:3219:31रात
गुरु19:3120:30रात
मंगल20:3021:30रात
सूर्य21:3022:29रात
शुक्र22:2923:29रात
बुध23:2900:28रात
चंद्र00:2801:27रात
शनि01:2702:27रात
गुरु02:2703:26रात
मंगल03:2604:26रात
सूर्य04:2605:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2016आश्विन अमावस्याअमावस्या
5 अक्टू॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2016आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2016तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0907° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।