19 अक्टूबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (19:32 तक), नक्षत्र रोहिणी (00:07, 20 अक्टू॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 11:21 से 12:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 17:07
रात 05:35 तक
तिथि
चतुर्थी, 19:32 तक
पंचमी
नक्षत्र
रोहिणी, 00:07 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2016 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 19:32 तक
कृष्ण पंचमी 16:46, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 00:07, 20 अक्टू॰ तक
मृगशिरा 22:14, 20 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 09:50 तक
वरीयान 06:12, 20 अक्टू॰ तक
करण
बव 09:07 तक
बालव 19:32 तक
कौलव 06:05, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
20:10
चंद्रास्त
08:40
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:21 – 12:47
यमगंड
07:01 – 08:28
गुलिक काल
09:54 – 11:21

19 अक्टूबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:34 – 07:01शुभ
अमृत07:01 – 08:28शुभ
काल08:28 – 09:54टालें
शुभ09:54 – 11:21शुभ
रोग11:21 – 12:47टालें
उद्वेग12:47 – 14:14टालें
चर14:14 – 15:41सामान्य
लाभ15:41 – 17:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:07 – 18:41टालें
शुभ18:41 – 20:14शुभ
अमृत20:14 – 21:48शुभ
चर21:48 – 23:21सामान्य
रोग23:21 – 00:54टालें
काल00:54 – 02:28टालें
लाभ02:28 – 04:01शुभ
उद्वेग04:01 – 05:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3406:32दिन
चंद्र06:3207:30दिन
शनि07:3008:28दिन
गुरु08:2809:25दिन
मंगल09:2510:23दिन
सूर्य10:2311:21दिन
शुक्र11:2112:19दिन
बुध12:1913:16दिन
चंद्र13:1614:14दिन
शनि14:1415:12दिन
गुरु15:1216:10दिन
मंगल16:1017:07दिन
सूर्य17:0718:10रात
शुक्र18:1019:12रात
बुध19:1220:14रात
चंद्र20:1421:16रात
शनि21:1622:19रात
गुरु22:1923:21रात
मंगल23:2100:23रात
सूर्य00:2301:26रात
शुक्र01:2602:28रात
बुध02:2803:30रात
चंद्र03:3004:32रात
शनि04:3205:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अक्टू॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2016कार्तिक अमावस्याअमावस्या
4 नव॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2016कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2016वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0917° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।