23 अक्टूबर 2016 को कोलकाता का पंचांग

रविवार, 23 अक्टूबर 2016, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 अक्टूबर 2016 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (12:28 तक), नक्षत्र पुष्य (20:38 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 17:04 पर है। राहुकाल 15:38 से 17:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 17:04
रात 05:37 तक
तिथि
अष्टमी, 12:28 तक
नवमी
नक्षत्र
पुष्य, 20:38 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2016 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 12:28 तक
कृष्ण नवमी 12:30, 24 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 20:38 तक
आश्लेषा 21:31, 24 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 20:50 तक
शुभ 19:55, 24 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:28 तक
तैतिल 00:24, 24 अक्टू॰ तक
गर 12:30, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
17:04
चंद्रोदय
23:58
चंद्रास्त
12:26
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:43

अशुभ समय

राहुकाल
15:38 – 17:04
यमगंड
11:20 – 12:46
गुलिक काल
14:12 – 15:38

23 अक्टूबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:36 – 07:02टालें
चर07:02 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 09:54शुभ
अमृत09:54 – 11:20शुभ
काल11:20 – 12:46टालें
शुभ12:46 – 14:12शुभ
रोग14:12 – 15:38टालें
उद्वेग15:38 – 17:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:04 – 18:38शुभ
अमृत18:38 – 20:12शुभ
चर20:12 – 21:46सामान्य
रोग21:46 – 23:20टालें
काल23:20 – 00:54टालें
लाभ00:54 – 02:28शुभ
उद्वेग02:28 – 04:02टालें
शुभ04:02 – 05:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3606:33दिन
शुक्र06:3307:31दिन
बुध07:3108:28दिन
चंद्र08:2809:25दिन
शनि09:2510:23दिन
गुरु10:2311:20दिन
मंगल11:2012:18दिन
सूर्य12:1813:15दिन
शुक्र13:1514:12दिन
बुध14:1215:10दिन
चंद्र15:1016:07दिन
शनि16:0717:04दिन
गुरु17:0418:07रात
मंगल18:0719:10रात
सूर्य19:1020:12रात
शुक्र20:1221:15रात
बुध21:1522:18रात
चंद्र22:1823:20रात
शनि23:2000:23रात
गुरु00:2301:26रात
मंगल01:2602:28रात
सूर्य02:2803:31रात
शुक्र03:3104:34रात
बुध04:3405:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अक्टू॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अक्टू॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2016कार्तिक अमावस्याअमावस्या
4 नव॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2016कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2016वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0919° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।