5 अक्टूबर 2018 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (19:17 तक), नक्षत्र आश्लेषा (19:02 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 17:20 पर है। राहुकाल 09:55 से 11:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 17:20
रात 05:29 तक
तिथि
एकादशी, 19:17 तक
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 19:02 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2018 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 19:17 तक
कृष्ण द्वादशी 16:40, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 17:10, 6 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 06:21 तक
साध्य 03:06, 6 अक्टू॰ तक
शुभ 23:49, 6 अक्टू॰ तक
करण
बव 08:34 तक
बालव 19:17 तक
कौलव 05:59, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 19:02 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
17:20
चंद्रोदय
01:17
चंद्रास्त
14:44
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
09:55 – 11:24
यमगंड
14:22 – 15:51
गुलिक काल
06:58 – 08:27

5 अक्टूबर 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:29 – 06:58सामान्य
लाभ06:58 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:55शुभ
काल09:55 – 11:24टालें
शुभ11:24 – 12:53शुभ
रोग12:53 – 14:22टालें
उद्वेग14:22 – 15:51टालें
चर15:51 – 17:20सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:20 – 18:51टालें
काल18:51 – 20:22टालें
लाभ20:22 – 21:53शुभ
उद्वेग21:53 – 23:25टालें
शुभ23:25 – 00:56शुभ
अमृत00:56 – 02:27शुभ
चर02:27 – 03:58सामान्य
रोग03:58 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2906:28दिन
बुध06:2807:27दिन
चंद्र07:2708:27दिन
शनि08:2709:26दिन
गुरु09:2610:25दिन
मंगल10:2511:24दिन
सूर्य11:2412:24दिन
शुक्र12:2413:23दिन
बुध13:2314:22दिन
चंद्र14:2215:21दिन
शनि15:2116:21दिन
गुरु16:2117:20दिन
मंगल17:2018:21रात
सूर्य18:2119:22रात
शुक्र19:2220:22रात
बुध20:2221:23रात
चंद्र21:2322:24रात
शनि22:2423:25रात
गुरु23:2500:25रात
मंगल00:2501:26रात
सूर्य01:2602:27रात
शुक्र02:2703:28रात
बुध03:2804:28रात
चंद्र04:2805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 अक्टू॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अक्टू॰ 2018आश्विन अमावस्याअमावस्या
12 अक्टू॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2018तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अक्टू॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अक्टू॰ 2018आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
28 अक्टू॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 नव॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1191° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।