4 दिसंबर 2025 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (08:38 तक), नक्षत्र कृत्तिका (14:54 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 16:51 पर है। राहुकाल 12:47 से 14:09 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 16:51
रात 06:02 तक
तिथि
पूर्णिमा, 04:44 तक
नक्षत्र
कृत्तिका, 14:54 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 08:38 तक
पूर्णिमा 04:44, 5 दिस॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 00:56, 6 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:46, 5 दिस॰ तक
योग
शिव 12:34 तक
सिद्ध 08:08, 5 दिस॰ तक
करण
वणिज 08:38 तक
विष्टि (भद्रा) 18:41 तक
बव 04:44, 5 दिस॰ तक
बालव 14:48, 5 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
16:51
चंद्रोदय
16:04
चंद्रास्त
05:04
दिनमान
10h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
12:47 – 14:09
यमगंड
06:01 – 07:23
गुलिक काल
08:44 – 10:05

4 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:01 – 07:23शुभ
रोग07:23 – 08:44टालें
उद्वेग08:44 – 10:05टालें
चर10:05 – 11:26सामान्य
लाभ11:26 – 12:47शुभ
अमृत12:47 – 14:09शुभ
काल14:09 – 15:30टालें
शुभ15:30 – 16:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:51 – 18:30शुभ
चर18:30 – 20:09सामान्य
रोग20:09 – 21:48टालें
काल21:48 – 23:27टालें
लाभ23:27 – 01:05शुभ
उद्वेग01:05 – 02:44टालें
शुभ02:44 – 04:23शुभ
अमृत04:23 – 06:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0106:55दिन
मंगल06:5507:50दिन
सूर्य07:5008:44दिन
शुक्र08:4409:38दिन
बुध09:3810:32दिन
चंद्र10:3211:26दिन
शनि11:2612:20दिन
गुरु12:2013:14दिन
मंगल13:1414:09दिन
सूर्य14:0915:03दिन
शुक्र15:0315:57दिन
बुध15:5716:51दिन
चंद्र16:5117:57रात
शनि17:5719:03रात
गुरु19:0320:09रात
मंगल20:0921:15रात
सूर्य21:1522:21रात
शुक्र22:2123:27रात
बुध23:2700:32रात
चंद्र00:3201:38रात
शनि01:3802:44रात
गुरु02:4403:50रात
मंगल03:5004:56रात
सूर्य04:5606:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2192° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।