5 दिसंबर 2025 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:56, 6 दिस॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (11:46 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 16:51 पर है। राहुकाल 10:05 से 11:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 16:51
रात 06:03 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:56 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 11:46 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:56, 6 दिस॰ तक
कृष्ण द्वितीया 21:26, 6 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:46 तक
मृगशिरा 08:48, 6 दिस॰ तक
योग
सिद्ध 08:08 तक
साध्य 03:48, 6 दिस॰ तक
शुभ 23:45, 6 दिस॰ तक
करण
बालव 14:48 तक
कौलव 00:56, 6 दिस॰ तक
तैतिल 11:08, 6 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 22:15 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
16:51
चंद्रोदय
17:07
चंद्रास्त
06:17
दिनमान
10h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
10:05 – 11:27
यमगंड
14:09 – 15:30
गुलिक काल
07:23 – 08:44

5 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:02 – 07:23सामान्य
लाभ07:23 – 08:44शुभ
अमृत08:44 – 10:05शुभ
काल10:05 – 11:27टालें
शुभ11:27 – 12:48शुभ
रोग12:48 – 14:09टालें
उद्वेग14:09 – 15:30टालें
चर15:30 – 16:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:51 – 18:30टालें
काल18:30 – 20:09टालें
लाभ20:09 – 21:48शुभ
उद्वेग21:48 – 23:27टालें
शुभ23:27 – 01:06शुभ
अमृत01:06 – 02:45शुभ
चर02:45 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 06:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0206:56दिन
बुध06:5607:50दिन
चंद्र07:5008:44दिन
शनि08:4409:38दिन
गुरु09:3810:32दिन
मंगल10:3211:27दिन
सूर्य11:2712:21दिन
शुक्र12:2113:15दिन
बुध13:1514:09दिन
चंद्र14:0915:03दिन
शनि15:0315:57दिन
गुरु15:5716:51दिन
मंगल16:5117:57रात
सूर्य17:5719:03रात
शुक्र19:0320:09रात
बुध20:0921:15रात
चंद्र21:1522:21रात
शनि22:2123:27रात
गुरु23:2700:33रात
मंगल00:3301:39रात
सूर्य01:3902:45रात
शुक्र02:4503:51रात
बुध03:5104:57रात
चंद्र04:5706:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2192° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।