13 अगस्त 2026 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 13 अगस्त 2026, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (20:42 तक), नक्षत्र आश्लेषा (06:06 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 13:18 से 14:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:09
रात 05:13 तक
तिथि
प्रतिपदा, 20:42 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मघा, 04:38 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अगस्त 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:42 तक
शुक्ल द्वितीया 18:47, 14 अग॰ तक
नक्षत्र
मघा 04:38, 14 अग॰ तक
योग
वरीयान 12:16 तक
परिघअशुभ 09:28, 14 अग॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 09:51 तक
बव 20:42 तक
बालव 07:40, 14 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 06:06 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
05:33
चंद्रास्त
18:40
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:44 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
13:18 – 14:55
यमगंड
05:12 – 06:49
गुलिक काल
08:27 – 10:04

13 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:12 – 06:49शुभ
रोग06:49 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 10:04टालें
चर10:04 – 11:41सामान्य
लाभ11:41 – 13:18शुभ
अमृत13:18 – 14:55शुभ
काल14:55 – 16:32टालें
शुभ16:32 – 18:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:09 – 19:32शुभ
चर19:32 – 20:55सामान्य
रोग20:55 – 22:18टालें
काल22:18 – 23:41टालें
लाभ23:41 – 01:04शुभ
उद्वेग01:04 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 03:50शुभ
अमृत03:50 – 05:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1206:17दिन
मंगल06:1707:22दिन
सूर्य07:2208:27दिन
शुक्र08:2709:31दिन
बुध09:3110:36दिन
चंद्र10:3611:41दिन
शनि11:4112:46दिन
गुरु12:4613:50दिन
मंगल13:5014:55दिन
सूर्य14:5516:00दिन
शुक्र16:0017:05दिन
बुध17:0518:09दिन
चंद्र18:0919:05रात
शनि19:0520:00रात
गुरु20:0020:55रात
मंगल20:5521:50रात
सूर्य21:5022:46रात
शुक्र22:4623:41रात
बुध23:4100:36रात
चंद्र00:3601:32रात
शनि01:3202:27रात
गुरु02:2703:22रात
मंगल03:2204:17रात
सूर्य04:1705:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2288° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।