17 मई 2027 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 17 मई 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 मई 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (16:28 तक), नक्षत्र हस्त (11:29 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 04:55 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 06:35 से 08:14 तक है।

दिन और रात
दिन 04:55 – 18:10
रात 04:55 तक
तिथि
द्वादशी, 16:28 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
हस्त, 11:29 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मई 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 16:28 तक
शुक्ल त्रयोदशी 16:04, 18 मई तक
नक्षत्र
हस्त 11:29 तक
चित्रा 11:43, 18 मई तक
योग
सिद्धि 01:10, 18 मई तक
व्यतीपातअशुभ 23:55, 18 मई तक
करण
बालव 16:28 तक
कौलव 04:13, 18 मई तक
तैतिल 16:04, 18 मई तक
चंद्र राशि
कन्या 23:33 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:55
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
15:23
चंद्रास्त
02:23
दिनमान
13h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:29 – 04:12
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
06:35 – 08:14
यमगंड
09:53 – 11:33
गुलिक काल
13:12 – 14:51

17 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत04:55 – 06:35शुभ
काल06:35 – 08:14टालें
शुभ08:14 – 09:53शुभ
रोग09:53 – 11:33टालें
उद्वेग11:33 – 13:12टालें
चर13:12 – 14:51सामान्य
लाभ14:51 – 16:31शुभ
अमृत16:31 – 18:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:10 – 19:30सामान्य
रोग19:30 – 20:51टालें
काल20:51 – 22:12टालें
लाभ22:12 – 23:32शुभ
उद्वेग23:32 – 00:53टालें
शुभ00:53 – 02:14शुभ
अमृत02:14 – 03:34शुभ
चर03:34 – 04:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र04:5506:01दिन
शनि06:0107:08दिन
गुरु07:0808:14दिन
मंगल08:1409:20दिन
सूर्य09:2010:26दिन
शुक्र10:2611:33दिन
बुध11:3312:39दिन
चंद्र12:3913:45दिन
शनि13:4514:51दिन
गुरु14:5115:57दिन
मंगल15:5717:04दिन
सूर्य17:0418:10दिन
शुक्र18:1019:04रात
बुध19:0419:57रात
चंद्र19:5720:51रात
शनि20:5121:45रात
गुरु21:4522:39रात
मंगल22:3923:32रात
सूर्य23:3200:26रात
शुक्र00:2601:20रात
बुध01:2002:14रात
चंद्र02:1403:07रात
शनि03:0704:01रात
गुरु04:0104:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
24 मई 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
8 जून 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2394° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।