1 जुलाई 2027 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 1 जुलाई 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 1 जुलाई 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (18:15 तक), नक्षत्र कृत्तिका (19:31 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 04:55 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 13:21 से 15:02 तक है।

दिन और रात
दिन 04:55 – 18:25
रात 04:55 तक
तिथि
द्वादशी, 18:15 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 19:31 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जुलाई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 18:15 तक
कृष्ण त्रयोदशी 15:23, 2 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:26, 2 जुल॰ तक
योग
धृति 05:57 तक
शूलअशुभ 02:50, 2 जुल॰ तक
गंडअशुभ 23:17, 2 जुल॰ तक
करण
कौलव 07:28 तक
तैतिल 18:15 तक
गर 04:53, 2 जुल॰ तक
वणिज 15:23, 2 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:55
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
01:40
चंद्रास्त
15:39
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:31 – 04:13
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
13:21 – 15:02
यमगंड
04:55 – 06:36
गुलिक काल
08:17 – 09:59

1 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ04:55 – 06:36शुभ
रोग06:36 – 08:17टालें
उद्वेग08:17 – 09:59टालें
चर09:59 – 11:40सामान्य
लाभ11:40 – 13:21शुभ
अमृत13:21 – 15:02शुभ
काल15:02 – 16:43टालें
शुभ16:43 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:25 – 19:44शुभ
चर19:44 – 21:02सामान्य
रोग21:02 – 22:21टालें
काल22:21 – 23:40टालें
लाभ23:40 – 00:59शुभ
उद्वेग00:59 – 02:18टालें
शुभ02:18 – 03:36शुभ
अमृत03:36 – 04:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु04:5506:02दिन
मंगल06:0207:10दिन
सूर्य07:1008:17दिन
शुक्र08:1709:25दिन
बुध09:2510:32दिन
चंद्र10:3211:40दिन
शनि11:4012:47दिन
गुरु12:4713:55दिन
मंगल13:5515:02दिन
सूर्य15:0216:10दिन
शुक्र16:1017:17दिन
बुध17:1718:25दिन
चंद्र18:2519:17रात
शनि19:1720:10रात
गुरु20:1021:02रात
मंगल21:0221:55रात
सूर्य21:5522:47रात
शुक्र22:4723:40रात
बुध23:4000:33रात
चंद्र00:3301:25रात
शनि01:2502:18रात
गुरु02:1803:10रात
मंगल03:1004:03रात
सूर्य04:0304:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2411° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।