2 जुलाई 2027 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 2 जुलाई 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 2 जुलाई 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (15:23 तक), नक्षत्र रोहिणी (17:26 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 04:55 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 09:59 से 11:40 तक है।

दिन और रात
दिन 04:55 – 18:25
रात 04:56 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:23 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 17:26 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जुलाई 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 15:23 तक
कृष्ण चतुर्दशी 12:06, 3 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:26 तक
मृगशिरा 14:55, 3 जुल॰ तक
योग
गंडअशुभ 23:17 तक
वृद्धि 19:25, 3 जुल॰ तक
करण
वणिज 15:23 तक
विष्टि (भद्रा) 01:47, 3 जुल॰ तक
शकुनि 12:06, 3 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:13, 3 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:55
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
02:34
चंद्रास्त
16:46
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:31 – 04:13
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
09:59 – 11:40
यमगंड
15:02 – 16:44
गुलिक काल
06:36 – 08:18

2 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर04:55 – 06:36सामान्य
लाभ06:36 – 08:18शुभ
अमृत08:18 – 09:59शुभ
काल09:59 – 11:40टालें
शुभ11:40 – 13:21शुभ
रोग13:21 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:44टालें
चर16:44 – 18:25सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:25 – 19:44टालें
काल19:44 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:21शुभ
उद्वेग22:21 – 23:40टालें
शुभ23:40 – 00:59शुभ
अमृत00:59 – 02:18शुभ
चर02:18 – 03:37सामान्य
रोग03:37 – 04:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र04:5506:03दिन
बुध06:0307:10दिन
चंद्र07:1008:18दिन
शनि08:1809:25दिन
गुरु09:2510:33दिन
मंगल10:3311:40दिन
सूर्य11:4012:47दिन
शुक्र12:4713:55दिन
बुध13:5515:02दिन
चंद्र15:0216:10दिन
शनि16:1017:17दिन
गुरु17:1718:25दिन
मंगल18:2519:17रात
सूर्य19:1720:10रात
शुक्र20:1021:02रात
बुध21:0221:55रात
चंद्र21:5522:48रात
शनि22:4823:40रात
गुरु23:4000:33रात
मंगल00:3301:25रात
सूर्य01:2502:18रात
शुक्र02:1803:10रात
बुध03:1004:03रात
चंद्र04:0304:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2412° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।