12 जुलाई 2027 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 12 जुलाई 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 जुलाई 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (11:41 तक), नक्षत्र स्वाति (23:56 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 04:59 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 06:40 से 08:20 तक है।

दिन और रात
दिन 04:59 – 18:24
रात 04:59 तक
तिथि
नवमी, 11:41 तक
दशमी
नक्षत्र
स्वाति, 23:56 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जुलाई 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 11:41 तक
शुक्ल दशमी 12:09, 13 जुल॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 23:56 तक
विशाखा 01:22, 14 जुल॰ तक
योग
सिद्ध 13:32 तक
साध्य 12:57, 13 जुल॰ तक
करण
कौलव 11:41 तक
तैतिल 23:50 तक
गर 12:09, 13 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:59
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
13:07
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:34 – 04:17
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:08

अशुभ समय

राहुकाल
06:40 – 08:20
यमगंड
10:01 – 11:42
गुलिक काल
13:22 – 15:03

12 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत04:59 – 06:40शुभ
काल06:40 – 08:20टालें
शुभ08:20 – 10:01शुभ
रोग10:01 – 11:42टालें
उद्वेग11:42 – 13:22टालें
चर13:22 – 15:03सामान्य
लाभ15:03 – 16:44शुभ
अमृत16:44 – 18:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:24 – 19:44सामान्य
रोग19:44 – 21:03टालें
काल21:03 – 22:22टालें
लाभ22:22 – 23:42शुभ
उद्वेग23:42 – 01:01टालें
शुभ01:01 – 02:21शुभ
अमृत02:21 – 03:40शुभ
चर03:40 – 04:59सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र04:5906:06दिन
शनि06:0607:13दिन
गुरु07:1308:20दिन
मंगल08:2009:27दिन
सूर्य09:2710:34दिन
शुक्र10:3411:42दिन
बुध11:4212:49दिन
चंद्र12:4913:56दिन
शनि13:5615:03दिन
गुरु15:0316:10दिन
मंगल16:1017:17दिन
सूर्य17:1718:24दिन
शुक्र18:2419:17रात
बुध19:1720:10रात
चंद्र20:1021:03रात
शनि21:0321:56रात
गुरु21:5622:49रात
मंगल22:4923:42रात
सूर्य23:4200:35रात
शुक्र00:3501:28रात
बुध01:2802:21रात
चंद्र02:2103:14रात
शनि03:1404:06रात
गुरु04:0604:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2416° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।