9 अगस्त 2027 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 9 अगस्त 2027, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 अगस्त 2027 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (22:34 तक), नक्षत्र स्वाति (06:22 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 06:48 से 08:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:12
रात 05:11 तक
तिथि
अष्टमी, 22:34 तक
नवमी
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अगस्त 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 22:34 तक
शुक्ल नवमी 23:28, 10 अग॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 06:22 तक
विशाखा 07:27, 10 अग॰ तक
योग
शुक्ल 20:16 तक
ब्रह्म 19:55, 10 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:24 तक
बव 22:34 तक
बालव 10:56, 10 अग॰ तक
चंद्र राशि
तुला 01:07, 10 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
11:58
चंद्रास्त
22:59
दिनमान
13h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:08

अशुभ समय

राहुकाल
06:48 – 08:26
यमगंड
10:04 – 11:42
गुलिक काल
13:19 – 14:57

9 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:11 – 06:48शुभ
काल06:48 – 08:26टालें
शुभ08:26 – 10:04शुभ
रोग10:04 – 11:42टालें
उद्वेग11:42 – 13:19टालें
चर13:19 – 14:57सामान्य
लाभ14:57 – 16:35शुभ
अमृत16:35 – 18:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:12 – 19:35सामान्य
रोग19:35 – 20:57टालें
काल20:57 – 22:19टालें
लाभ22:19 – 23:42शुभ
उद्वेग23:42 – 01:04टालें
शुभ01:04 – 02:26शुभ
अमृत02:26 – 03:49शुभ
चर03:49 – 05:11सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1106:16दिन
शनि06:1607:21दिन
गुरु07:2108:26दिन
मंगल08:2609:31दिन
सूर्य09:3110:36दिन
शुक्र10:3611:42दिन
बुध11:4212:47दिन
चंद्र12:4713:52दिन
शनि13:5214:57दिन
गुरु14:5716:02दिन
मंगल16:0217:07दिन
सूर्य17:0718:12दिन
शुक्र18:1219:07रात
बुध19:0720:02रात
चंद्र20:0220:57रात
शनि20:5721:52रात
गुरु21:5222:47रात
मंगल22:4723:42रात
सूर्य23:4200:37रात
शुक्र00:3701:31रात
बुध01:3102:26रात
चंद्र02:2603:21रात
शनि03:2104:16रात
गुरु04:1605:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2426° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।