25 मई 2028 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 25 मई 2028, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 25 मई 2028 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (12:54 तक), नक्षत्र रोहिणी (14:38 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 04:52 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 13:13 से 14:53 तक है।

दिन और रात
दिन 04:52 – 18:14
रात 04:52 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:54 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 14:38 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 मई 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 12:54 तक
शुक्ल द्वितीया 11:40, 26 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 14:38 तक
मृगशिरा 14:07, 26 मई तक
योग
सुकर्मा 13:55 तक
धृति 11:52, 26 मई तक
करण
बव 12:54 तक
बालव 00:20, 26 मई तक
कौलव 11:40, 26 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 02:25, 26 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:52
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
05:20
चंद्रास्त
19:24
दिनमान
13h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:27 – 04:10
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 12:00

अशुभ समय

राहुकाल
13:13 – 14:53
यमगंड
04:52 – 06:33
गुलिक काल
08:13 – 09:53

25 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ04:52 – 06:33शुभ
रोग06:33 – 08:13टालें
उद्वेग08:13 – 09:53टालें
चर09:53 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 13:13शुभ
अमृत13:13 – 14:53शुभ
काल14:53 – 16:34टालें
शुभ16:34 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:14 – 19:34शुभ
चर19:34 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:13टालें
काल22:13 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 00:53शुभ
उद्वेग00:53 – 02:13टालें
शुभ02:13 – 03:32शुभ
अमृत03:32 – 04:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु04:5205:59दिन
मंगल05:5907:06दिन
सूर्य07:0608:13दिन
शुक्र08:1309:20दिन
बुध09:2010:26दिन
चंद्र10:2611:33दिन
शनि11:3312:40दिन
गुरु12:4013:47दिन
मंगल13:4714:53दिन
सूर्य14:5316:00दिन
शुक्र16:0017:07दिन
बुध17:0718:14दिन
चंद्र18:1419:07रात
शनि19:0720:00रात
गुरु20:0020:53रात
मंगल20:5321:47रात
सूर्य21:4722:40रात
शुक्र22:4023:33रात
बुध23:3300:26रात
चंद्र00:2601:19रात
शनि01:1902:13रात
गुरु02:1303:06रात
मंगल03:0603:59रात
सूर्य03:5904:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 मई 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 जून 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2537° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।