19 जुलाई 2028 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 19 जुलाई 2028, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 जुलाई 2028 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (15:22 तक), नक्षत्र रोहिणी (08:56 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:02 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 11:42 से 13:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:02 – 18:22
रात 05:03 तक
तिथि
द्वादशी, 15:22 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रोहिणी, 08:56 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 जुलाई 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 15:22 तक
कृष्ण त्रयोदशी 13:37, 20 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:56 तक
मृगशिरा 08:08, 20 जुल॰ तक
योग
वृद्धि 09:55 तक
ध्रुव 07:36, 20 जुल॰ तक
करण
तैतिल 15:22 तक
गर 02:34, 20 जुल॰ तक
वणिज 13:37, 20 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:37 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:02
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
01:49
चंद्रास्त
15:53
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:37 – 04:20
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:09 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:42 – 13:22
यमगंड
06:42 – 08:22
गुलिक काल
10:02 – 11:42

19 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:02 – 06:42शुभ
अमृत06:42 – 08:22शुभ
काल08:22 – 10:02टालें
शुभ10:02 – 11:42शुभ
रोग11:42 – 13:22टालें
उद्वेग13:22 – 15:02टालें
चर15:02 – 16:42सामान्य
लाभ16:42 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:22 – 19:42टालें
शुभ19:42 – 21:02शुभ
अमृत21:02 – 22:22शुभ
चर22:22 – 23:42सामान्य
रोग23:42 – 01:03टालें
काल01:03 – 02:23टालें
लाभ02:23 – 03:43शुभ
उद्वेग03:43 – 05:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0206:09दिन
चंद्र06:0907:16दिन
शनि07:1608:22दिन
गुरु08:2209:29दिन
मंगल09:2910:36दिन
सूर्य10:3611:42दिन
शुक्र11:4212:49दिन
बुध12:4913:56दिन
चंद्र13:5615:02दिन
शनि15:0216:09दिन
गुरु16:0917:16दिन
मंगल17:1618:22दिन
सूर्य18:2219:16रात
शुक्र19:1620:09रात
बुध20:0921:02रात
चंद्र21:0221:56रात
शनि21:5622:49रात
गुरु22:4923:42रात
मंगल23:4200:36रात
सूर्य00:3601:29रात
शुक्र01:2902:23रात
बुध02:2303:16रात
चंद्र03:1604:09रात
शनि04:0905:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2558° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।