9 अगस्त 2029 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 9 अगस्त 2029, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 9 अगस्त 2029 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (09:10 तक), नक्षत्र पुष्य (19:44 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 13:19 से 14:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:12
रात 05:11 तक
तिथि
चतुर्दशी, 09:10 तक
अमावस्या
नक्षत्र
पुष्य, 19:44 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अगस्त 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 09:10 तक
अमावस्या 07:25, 10 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 19:44 तक
आश्लेषा 18:31, 10 अग॰ तक
योग
सिद्धि 09:27 तक
व्यतीपातअशुभ 06:59, 10 अग॰ तक
करण
शकुनि 09:10 तक
चतुष्पद 20:22 तक
नाग 07:25, 10 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
04:11
चंद्रास्त
17:33
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:43 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
13:19 – 14:57
यमगंड
05:11 – 06:48
गुलिक काल
08:26 – 10:04

9 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:11 – 06:48शुभ
रोग06:48 – 08:26टालें
उद्वेग08:26 – 10:04टालें
चर10:04 – 11:41सामान्य
लाभ11:41 – 13:19शुभ
अमृत13:19 – 14:57शुभ
काल14:57 – 16:34टालें
शुभ16:34 – 18:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:12 – 19:34शुभ
चर19:34 – 20:57सामान्य
रोग20:57 – 22:19टालें
काल22:19 – 23:42टालें
लाभ23:42 – 01:04शुभ
उद्वेग01:04 – 02:26टालें
शुभ02:26 – 03:49शुभ
अमृत03:49 – 05:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1106:16दिन
मंगल06:1607:21दिन
सूर्य07:2108:26दिन
शुक्र08:2609:31दिन
बुध09:3110:36दिन
चंद्र10:3611:41दिन
शनि11:4112:47दिन
गुरु12:4713:52दिन
मंगल13:5214:57दिन
सूर्य14:5716:02दिन
शुक्र16:0217:07दिन
बुध17:0718:12दिन
चंद्र18:1219:07रात
शनि19:0720:02रात
गुरु20:0220:57रात
मंगल20:5721:52रात
सूर्य21:5222:47रात
शुक्र22:4723:42रात
बुध23:4200:37रात
चंद्र00:3701:31रात
शनि01:3102:26रात
गुरु02:2603:21रात
मंगल03:2104:16रात
सूर्य04:1605:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2706° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।