16 सितंबर 2039 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 16 सितंबर 2039, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2039 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (15:33 तक), नक्षत्र आश्लेषा (06:19 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 09:59 से 11:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 17:39
रात 05:23 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:33 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 सितंबर 2039 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 15:33 तक
कृष्ण चतुर्दशी 15:00, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 06:41, 17 सित॰ तक
योग
सिद्ध 01:42, 17 सित॰ तक
साध्य 23:59, 17 सित॰ तक
करण
वणिज 15:33 तक
विष्टि (भद्रा) 03:21, 17 सित॰ तक
शकुनि 15:00, 17 सित॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 06:19 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
03:13
चंद्रास्त
16:37
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2096
शक संवत
1961, सिद्धार्थी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
09:59 – 11:31
यमगंड
14:35 – 16:07
गुलिक काल
06:55 – 08:27

16 सितंबर 2039 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:23 – 06:55सामान्य
लाभ06:55 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:59शुभ
काल09:59 – 11:31टालें
शुभ11:31 – 13:03शुभ
रोग13:03 – 14:35टालें
उद्वेग14:35 – 16:07टालें
चर16:07 – 17:39सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:39 – 19:07टालें
काल19:07 – 20:35टालें
लाभ20:35 – 22:03शुभ
उद्वेग22:03 – 23:31टालें
शुभ23:31 – 00:59शुभ
अमृत00:59 – 02:27शुभ
चर02:27 – 03:55सामान्य
रोग03:55 – 05:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2306:24दिन
बुध06:2407:26दिन
चंद्र07:2608:27दिन
शनि08:2709:28दिन
गुरु09:2810:30दिन
मंगल10:3011:31दिन
सूर्य11:3112:32दिन
शुक्र12:3213:34दिन
बुध13:3414:35दिन
चंद्र14:3515:36दिन
शनि15:3616:38दिन
गुरु16:3817:39दिन
मंगल17:3918:38रात
सूर्य18:3819:36रात
शुक्र19:3620:35रात
बुध20:3521:34रात
चंद्र21:3422:32रात
शनि22:3223:31रात
गुरु23:3100:30रात
मंगल00:3001:28रात
सूर्य01:2802:27रात
शुक्र02:2703:26रात
बुध03:2604:25रात
चंद्र04:2505:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 सित॰ 2039प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 सित॰ 2039कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2039आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2039विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2039शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2039प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अक्टू॰ 2039अधिक आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
6 अक्टू॰ 2039संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2039कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2039कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 अक्टू॰ 2039प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4117° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।