31 अक्टूबर 2080 को कोलकाता का पंचांग

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2080, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2080 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (17:56 तक), नक्षत्र रोहिणी (23:38 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 12:44 से 14:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 16:59
रात 05:41 तक
तिथि
तृतीया, 17:56 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 23:38 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2080 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 17:56 तक
कृष्ण चतुर्थी 16:03, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:38 तक
मृगशिरा 22:24, 1 नव॰ तक
योग
वरीयान 11:29 तक
परिघअशुभ 08:50, 1 नव॰ तक
करण
वणिज 06:48 तक
विष्टि (भद्रा) 17:56 तक
बव 05:01, 1 नव॰ तक
बालव 16:03, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
18:59
चंद्रास्त
08:09
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2137
शक संवत
2002, शार्वरी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:42

अशुभ समय

राहुकाल
12:44 – 14:09
यमगंड
05:40 – 07:05
गुलिक काल
08:30 – 09:55

31 अक्टूबर 2080 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:40 – 07:05शुभ
रोग07:05 – 08:30टालें
उद्वेग08:30 – 09:55टालें
चर09:55 – 11:19सामान्य
लाभ11:19 – 12:44शुभ
अमृत12:44 – 14:09शुभ
काल14:09 – 15:34टालें
शुभ15:34 – 16:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:59 – 18:34शुभ
चर18:34 – 20:09सामान्य
रोग20:09 – 21:44टालें
काल21:44 – 23:20टालें
लाभ23:20 – 00:55शुभ
उद्वेग00:55 – 02:30टालें
शुभ02:30 – 04:05शुभ
अमृत04:05 – 05:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4006:37दिन
मंगल06:3707:33दिन
सूर्य07:3308:30दिन
शुक्र08:3009:26दिन
बुध09:2610:23दिन
चंद्र10:2311:19दिन
शनि11:1912:16दिन
गुरु12:1613:13दिन
मंगल13:1314:09दिन
सूर्य14:0915:06दिन
शुक्र15:0616:02दिन
बुध16:0216:59दिन
चंद्र16:5918:02रात
शनि18:0219:06रात
गुरु19:0620:09रात
मंगल20:0921:13रात
सूर्य21:1322:16रात
शुक्र22:1623:20रात
बुध23:2000:23रात
चंद्र00:2301:27रात
शनि01:2702:30रात
गुरु02:3003:34रात
मंगल03:3404:37रात
सूर्य04:3705:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2080संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 नव॰ 2080कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 नव॰ 2080कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 नव॰ 2080प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 नव॰ 2080कार्तिक अमावस्याअमावस्या
15 नव॰ 2080विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2080वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
23 नव॰ 2080शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 नव॰ 2080प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 नव॰ 2080कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9864° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।